Eco-Friendly Paver Blocks : अब प्लास्टिक नहीं रहेगा सिरदर्द, बनेगा सड़क का सहारा; जानिए कैसे?
पटना नगर निगम ने प्लास्टिक कचरे से पेवर ब्लॉक बनाने की पहल की है। रामचक बैरिया में संयंत्र स्थापित हो ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मनीष कुमार, पटना। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सशक्त बनाने की दिशा में पटना नगर निगम ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ निर्माण को भी बढ़ावा देगी।
अब पुनर्चक्रण नहीं होने वाले प्लास्टिक कचरे से पेवर ब्लाक का निर्माण किया जाएगा। यह प्रयोग न सिर्फ कचरे की समस्या का समाधान बनेगा, बल्कि शहर के लिए पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री भी उपलब्ध कराएगा।
रामचक बैरिया में इसके लिए विशेष संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन लगभग दो हजार पेवर ब्लाक तैयार किए जा सकेंगे।
कैसे सामने आई यह जरूरत
राजधानी पटना में प्रतिदिन करीब 1100 टन कचरा निकलता है, जिसमें लगभग 22 टन प्लास्टिक कचरा होता है। वर्षों से कचरा भराव स्थलों पर करीब 13 लाख टन कचरा जमा हो चुका है।
इससे न सिर्फ जमीन पर दबाव बढ़ रहा है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नगर निगम के लिए इस कचरे का वैज्ञानिक और टिकाऊ निपटान एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
कैसे तैयार हुए प्लास्टिक से पेवर ब्लाक
नगर आयुक्त यशपाल मीणा के नेतृत्व में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग ने इस दिशा में नई सोच के साथ काम शुरू किया। लैब स्तर पर तैयार किए गए प्लास्टिक पेवर ब्लाक सभी निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं।
अब ट्रायल के बाद स्वीकृति मिलते ही बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जाएगा। यह संयंत्र विशेष रूप से ऐसे प्लास्टिक कचरे के उपयोग के लिए तैयार किया गया है, जिसका सामान्य तौर पर पुनर्चक्रण संभव नहीं होता।
कैसे होती है निर्माण की प्रक्रिया
सबसे पहले बेकार और अनुपयोगी प्लास्टिक को एकत्र किया जाता है। इन्हें अच्छी तरह धोकर बारीक टुकड़ों में काटा जाता है। इसके बाद प्लास्टिक को पिघलाकर रेत, खदान की धूल या सिरेमिक कचरे जैसे एग्रीगेट के साथ मिलाया जाता है।
तैयार गर्म मिश्रण को सांचों में डालकर पेवर ब्लाक बनाए जाते हैं। ठंडा होने पर ये ब्लाक सख्त और उपयोग के लिए तैयार हो जाते हैं।
कैसे मिलेंगे पर्यावरण और आर्थिक फायदे
प्लास्टिक से बने पेवर ब्लाक प्रदूषण कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे प्लास्टिक कचरे का प्रभावी निपटान होगा और सीमेंट के उपयोग में कमी आने से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी घटेगा।
ये ब्लाक पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में हल्के, मजबूत और किफायती होते हैं। साथ ही इनमें गर्मी, ठंड और ध्वनि के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता होती है।
कैसे और कहां होगा उपयोग
इन पेवर ब्लाक का उपयोग बगीचों, पैदल मार्गों, आंगन, साइकिल पथ और कम यातायात वाली सड़कों व गलियों में किया जा सकता है।
हालांकि, इनकी संपीडन शक्ति कंक्रीट से कुछ कम होती है, इसलिए भारी यातायात वाले क्षेत्रों में इनका प्रयोग सीमित रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीकों और मिश्रणों से इनकी मजबूती और जल प्रतिरोधक क्षमता को और बढ़ाया जा सकता है।
कैसे बदलेगी शहर की तस्वीर
नगर निगम की यह पहल कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास- तीनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य शहरों के लिए भी यह मॉडल बनेगा और प्लास्टिक कचरे को बोझ नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखा जाएगा।
