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सुपौल: 25 एकड़ में होगी क्लस्टर आधारित नींबू की खेती, किसानों को मिलेगा 1 लाख तक अनुदान

Published: Tue, 01 Sep 2026 04:57 PM (IST)

सुपौल में 25 एकड़ भूमि पर क्लस्टर आधारित नींबू की खेती की जाएगी, जिसके लिए किसानों को प्रति एकड़ एक ...और पढ़ें

25 एकड़ में होगी क्लस्टर आधारित नींबू की खेती, किसानों को मिलेगा 1 लाख तक अनुदान (AI Generated Image)

25 एकड़ में होगी क्लस्टर आधारित नींबू की खेती, किसानों को मिलेगा 1 लाख तक अनुदान (AI Generated Image)

HighLights

  1. 25 एकड़ में क्लस्टर आधारित नींबू की खेती का लक्ष्य।

  2. किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक का अनुदान।

  3. पारंपरिक खेती से हटकर आय बढ़ाने का प्रयास।

जागरण संवाददाता, सुपौल। जिले में उद्यानिक फसलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से गांव की बागवानी, हमारे गौरव की कहानी राज्य योजना के तहत क्लस्टर आधारित नींबू की बागवानी कराई जाएगी। चालू वित्तीय वर्ष में जिले में 25 एकड़ भूमि पर नींबू की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए चयनित किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। विभाग की ओर से क्लस्टर गठन के लिए इच्छुक किसानों की तलाश शुरू कर दी गई है। योजना के तहत नींबू की खेती के लिए एक क्लस्टर बनाया जाएगा। एक क्लस्टर में न्यूनतम 13 और अधिकतम 30 किसान शामिल होंगे।

खास बात यह है कि योजना का लाभ केवल जमीन मालिक यानी रैयत किसानों को ही नहीं, बल्कि बटाई पर खेती करने वाले गैर-रैयत किसानों को भी मिलेगा। क्लस्टर में सामान्य, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों की भागीदारी भी अनिवार्य होगी।

दो किस्तों में किसानों को मिलेगा भुगतान

क्लस्टर में शामिल किसान न्यूनतम 0.25 एकड़ और अधिकतम 10 एकड़ भूमि में नींबू की बागवानी कर सकते हैं। एक एकड़ भूमि में बागवानी करने वाले किसान को एक लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। हालांकि, अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को पहले अपने स्तर से बागीचा तैयार करना होगा।

पौधों की खरीद, खेत की तैयारी, खाद एवं पोषक तत्व, कीटनाशी, सिंचाई और घेराबंदी की व्यवस्था किसान को अपनी लागत से करनी होगी। बागीचा तैयार होने के बाद विभाग की ओर से उसका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

सत्यापन के बाद दो किस्तों में अनुदान की राशि का भुगतान किया जाएगा। पहले चरण में 75 प्रतिशत यानी 75 हजार रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया जाएगा। इसके बाद बागीचे में 100 प्रतिशत पौधे सुरक्षित पाए जाने पर शेष 25 प्रतिशत यानी 25 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा।

इच्छ़ुक किसान कर सकते हैं आवेदन

क्लस्टर आधारित नींबू की बागवानी के लिए इच्छुक किसान बिहार कृषि एप और उद्यान विभाग की वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी के लिए किसान जिला उद्यान कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

योजना का उद्देश्य पारंपरिक फसलों धान और गेहूं की खेती से इतर किसानों को उद्यानिक फसलों की ओर आकर्षित करना और उनकी आय बढ़ाना है। एक ही क्षेत्र में एक जैसी फलदार फसल की खेती होने से किसानों को वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक नर्सरी का लाभ सामूहिक रूप से मिल सकेगा।

इसके अलावा उत्पाद की बेहतर पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। किसानों को ड्रिप एरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने में भी सहूलियत होगी।

किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रयास

जिले की खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है। धान, गेहूं और मक्का यहां की प्रमुख फसलें हैं। पिछले कई वर्षों से समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण पारंपरिक खेती किसानों के लिए मुश्किल होती जा रही है।

वहीं, खेती की बढ़ती लागत, सिंचाई और रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता के कारण किसानों का मुनाफा भी प्रभावित हो रहा है।

इसी को देखते हुए सरकार कम खर्च और कम पानी में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बागवानी को प्रोत्साहित कर रही है। विभाग का मानना है कि क्लस्टर आधारित बागवानी किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

त्रिवेणीगंज में पूर्व से हो रही है खेती

जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड में पहले से ही क्लस्टर के रूप में नींबू की खेती की जा रही है। विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष यहां 25 एकड़ में नींबू की खेती शुरू कराई गई थी। अब इन बागानों में फल भी लगने शुरू हो गए हैं।

इसके उत्साहजनक परिणाम को देखते हुए चालू वित्तीय वर्ष में भी त्रिवेणीगंज प्रखंड में नींबू की खेती कराने पर जोर दिया जा रहा है।

इसके लिए प्रखंड उद्यान पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर इच्छुक किसानों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जल्द क्लस्टर का गठन कर नींबू की बागवानी शुरू कराई जा सके।

विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में त्रिवेणीगंज नींबू उत्पादन का हब बनेगा और इससे जिले को नींबू उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

बागवानी के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से गांव की बागवानी, हमारे गौरव की कहानी योजना शुरू की गई है। इसके तहत जिले में 25 एकड़ भूमि में क्लस्टर आधारित नींबू की बागवानी की जाएगी। एक एकड़ भूमि में बागवानी करने वाले किसानों को एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। चयनित किसानों को अनुदान की राशि दो किस्तों में दी जाएगी। - डॉ. अमृता कुमारी, जिला उद्यान पदाधिकारी

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