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सुपौल के किसानों की बल्ले-बल्ले, धनिया-मेथी प्याज और टमाटर की खेती पर मिलेगा अनुदान, क्लस्टर मॉडल से बढ़ेगी आय

Published: Wed, 28 Oct 2026 07:46 PM (IST)

सुपौल जिले में किसानों की आय बढ़ाने और मसालों पर निर्भरता कम करने के लिए उद्यान विभाग ने धनिया, मेथी, प्याज और टमाटर की क्लस्टर आधारित खेती शुरू की है।

मसाला व सब्जी की उन्नत खेती की तैयारी करते किसान व विभागीय अधिकारी । प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मसाला व सब्जी की उन्नत खेती की तैयारी करते किसान व विभागीय अधिकारी । प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

HighLights

  1. सुपौल में मसाला-सब्जी की क्लस्टर आधारित खेती शुरू।

  2. किसानों को धनिया, मेथी, प्याज, टमाटर पर अनुदान।

  3. चार प्रखंडों में 25-25 हेक्टेयर के क्लस्टर।

संवाददाता, सुपौल। कोसी क्षेत्र के सुपौल जिले में अब केवल धान और गेहूं की पारंपरिक खेती तक ही किसान सीमित नहीं रहेंगे। जिले में मसाला और सब्जी फसलों के उत्पादन को नई पहचान देने की दिशा में उद्यान विभाग ने बड़ी पहल की है।

किसानों की आय में इजाफा करने और अन्य जिलों से आने वाले मसालों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से धनिया, मेथी, प्याज और टमाटर की क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। खास बात यह है कि इन फसलों को अपनाने वाले किसानों को सरकार की ओर से अनुदान (Subsidy) भी प्रदान किया जाएगा।

विभाग का मानना है कि यदि यह क्लस्टर योजना सफल रहती है, तो आने वाले दिनों में सुपौल जिला राज्य में मसाला फसलों के प्रमुख उत्पादक केंद्र के रूप में उभरेगा।

4 प्रखंडों में 25-25 हेक्टेयर के क्लस्टर का गठन

उद्यान विभाग ने मिट्टी, मौसम और स्थानीय अनुकूलता के आधार पर चार अलग-अलग प्रखंडों का चयन कर 25-25 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है:

  • प्रतापगंज प्रखंड: धनिया की वैज्ञानिक खेती के लिए चयनित।

  • त्रिवेणीगंज प्रखंड: मेथी उत्पादन का क्लस्टर केंद्र।

  • मरौना प्रखंड: प्याज की व्यावसायिक खेती के लिए चुना गया।

  • बसंतपुर प्रखंड: टमाटर के बड़े पैमाने पर उत्पादन का हब बनेगा।

इन चारों क्षेत्रों में किसानों के समूह (ग्रुप) तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से खेती की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है।

बीज वितरण पूरा, सत्यापन के बाद खाते में आएगी सब्सिडी

योजना के तहत पंजीकृत किसानों के बीच उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का वितरण संपन्न हो चुका है। फसल की बुवाई और उत्पादन के बाद विभागीय टीम खेतों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करेगी।

जांच रिपोर्ट सही पाए जाने पर पात्र किसानों को अनुदान की निर्धारित राशि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इससे किसानों पर शुरुआती लागत का आर्थिक बोझ कम होगा और बड़े पैमाने पर उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।

स्थानीय बाजार और आर्थिक स्वावलंबन

पूर्व में किसान अपनी निजी जरूरतों के अनुसार छोटे स्तर पर इन फसलों की खेती करते थे, लेकिन पहली बार इसे व्यावसायिक और योजनाबद्ध रूप दिया जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर सब्जियों और मसालों की बंपर पैदावार होने से स्थानीय मंडियों में ताजी उपज सस्ते दरों पर मिलेगी, वहीं किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम प्राप्त होगा।

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"किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी करने और जिले में मसाला तथा सब्जी फसलों के रकबे को बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। चयनित क्लस्टर में खेती करने वाले किसानों को विभागीय नियमों के अनुसार अनुदान दिया जाएगा, जिससे वे पारंपरिक खेती से अलग व्यावसायिक खेती की ओर प्रोत्साहित हो सकें।"

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— डॉ. अमृता कुमारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, सुपौल