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जागरण संवाददाता, सुपौल: स्वच्छता रैंकिग में सुपौल लगातार अव्वल स्थान पर रहा है। ये शहरवासियों के लिए गौरव की बात है और नप की कार्यशैली को भी दर्शाता है, लेकिन रेटिग के मामले में शहर को और उपर उठने की जरूरत है। इसके लिए नप को जल निस्तारण की पालिसी और उसके मास्टर प्लान पर गंभीर होना होगा। पहले रेलवे लाइन के किनारे से पूरे शहर का पानी दक्षिण दिशा की ओर निकल जाता था। नप की योजना भी इसी के आधार पर बना करती थी।

रेलवे के अमान परिवर्तन के बाद विकास की जो लकीर खींची गई इससे जल निस्तारण एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है। इसके लिए नप को भी गंभीर होना होगा। शहर की हालत है कि नाले की भरमार है लेकिन जल निकासी के मामले में विगत दो-तीन सालों से काफी परेशानी हो रही है। हालांकि नाले की बड़ी परियोजना पर काम चल रहा है। लेकिन यहां जल निस्तारण की बड़ी समस्या सामने आने वाली है। बरसात के मौसम में तो व्यवस्था की पूरी पोल ही खुल जाती है। शहर के बीचोबीच जो नाले हैं उसकी निकासी तो थोड़े सलीके से हो जाया करती है लेकिन कई मुहल्ले से पानी निकलना मुश्किल हो जाता है। पहले शहर का पानी जिस इलाके में निकाल दिया जाता था, अब विकास के दौर में परेशानी शुरू हो गई है। आने वाले समय में जल निस्तारण की बड़ी समस्या से शहर को जूझना पड़ सकता है।

जितेंद्र कुमार कहते हैं कि हमें उतना जागरूक तो होना ही होगा कि हम अपने घर को जिस तरह साफ रखना चाहते हैं अपने शहर को भी रखें। तभी हम इंदौर जैसे शहरों की श्रेणी में गिने जाएंगे। जल निस्तारण के लिए सबको मिलकर सोचने की जरूरत है। देश के 342 साफ शहरों को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है जिसमें सुपौल भी शामिल है। ईस्ट जोन में तो बिहार का पहला स्वच्छ शहर है। इन शहरों को 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2021' में स्वच्छ और कचरा मुक्त होने के लिए स्टार रेटिग से सम्मानित किया गया है। देश के, राज्य के, जिले के, कस्बे एवं गावों की स्वच्छता संबंधी स्थिति जानने हेतु प्रतिवर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण किया जाता है। स्वच्छ सर्वेक्षण में ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में स्वच्छता के मापदंड के अनुसार उनकी प्रगति एवं रैंकिग की जाती है। इसके अतिरिक्त इस सर्वेक्षण के बाद जिलों की रैकिग की जाती है और उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है तथा क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने शौचालयों का मूल्यांकन भी इस सर्वेक्षण के दौरान किया जाता है। इन्हीं सर्वेक्षणों के माध्यम से किसी देश की प्रगति या वृद्धि का अनुमान लगाया जा सकता है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के स्वच्छता सर्वेक्षण में कुछ अन्य नए आयामों को भी शामिल किया गया है जिसमें अपशिष्ट जल के निस्तारण के बाद उसे फिर से स्वच्छ कर प्रयोग करने पर कार्य किया जाएगा। इस प्रयास से एक बड़ा परिवर्तन हुआ है कि लोग अब अपने आसपास के स्थानों को सुरक्षित रखने लगे। इसके अतिरिक्त अब सामान्य जन भी स्वच्छता का महत्व समझने लगे हैं। -----------------------------------------------------

मैं भी स्वच्छता प्रहरी : डस्टबिन में डालें कचरा

(इसे फार्मेट में लगाएं) फोटो-25 एसयूपी-17

जांस, सुपौल : स्थानीय वार्ड नंबर 15 निवासी प्रमोद कुमार कहते हैं कि लोग घरों से कचरा उठाकर सड़कों के किनारे फेंक देते हैं। जबतक कचरे को उठाया नहीं जाता है सड़क गंदी रहती है। मैं इस तरह के लोगों को चिह्नित कर उन्हें कचरा को डस्टबिन में डालने के लिए अनुरोध करूंगा। इसके लिए रोजाना कम से कम एक व्यक्ति को प्रेरित करूंगा।

Edited By: Jagran