सुपौल। धरहरा पंचायत के वार्ड नंबर 6 चिकनापट्टी गांव में सत्यनारायण यादव के आवास पर चल रहे सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा के दौरान बुधवार को सातवें व अंतिम दिन राधा-कृष्ण की भव्य झांकी निकाली गई। लोगों ने आनंदपूर्वक व झूमकर झांकी का आनंद उठाया। भागवत कथा के सातवें व अंतिम दिन अयोध्या धाम से पधारे कथाव्यास पंडित रविन्द्र शास्त्री महाराज ने सुदामा चरित्र प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा भगवान के परम प्रिय भक्त थे और मित्र भी थे। संदीपन मुनि के आश्रम में दोनों ने शिक्षा ग्रहण किया। सुदामा अपने याचक वृति का कभी उन्होंने अपमान नहीं कराया। सुदामा के चरित्र से हमको यह शिक्षा लेनी चाहिए। मनुष्य गृहस्थ आश्रम में भी रहकर के परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। सुदामा के अंदर संतोष था, सुदामा ने भगवान कृष्ण के हिस्से का भी जो चना खाया था उससे वे दरिद्र हो गए। चना खाने से गरीब हो गये इसका एक रहस्य संत लोग बताते हैं कि एक बुढि़या मांगने के लिए गयी उनको चने मिल गए। पांच दिन की भूखी थी वो तब तक एक एकादशी का व्रत कर लिया और सोचा कि सवेरे हम पारण इसी चने को खाकर कर लेंगे और वह भी संदीपन मुनि के आश्रम में गिर गया। संयोग से वो चना गुरुमाता ने दोनों को खाने के लिए दे दिया। उधर उस बुढि़या ने जो श्राप दे दिया था कि उस चने को जो भी खायेगा वह दरिद्र हो जाएगा। सुदामा ने सोचा मेरा कृष्ण दरिद्र हो जाएगा तो विश्व का भरण पोषण कैसे करेगा इसलिए स्वयं चना को खाकर दरिद्र हो गए। मित्र मिलन के बाद परमात्मा ने उस दरिद्रता को समाप्त कर दिया और तीनों लोक का राजा बना दिया। सुदामा का भक्ति त्याग और समर्पण का प्रतीक है।

मौके पर जयप्रकाश चौधरी, जनार्दन साह, सिकेन्द्र प्रसाद यादव, राजकिशोर यादव, अजय यादव, रामसेवक यादव, अशोक यादव, हेमंत कुमार राज, अरुण जयसवाल, अजय यादव, शिव ठाकुर, महेश यादव, राजेन्द्र चौधरी, ऋषिकांत विश्वकर्मा, जगदीश ठाकुर, सुभाष यादव, गोलू, विवेक, विशाल, प्रज्ञा, मधु, जया, संजु देवी, अर्चना यादव, चंदा देवी, सुनीता चौधरी, संगीत देवी, आशा देवी, रेखा देवी, रेणु देवी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।

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