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सुपौल में 81 फीट की भव्य कांवड़ में सजे 12 ज्योतिर्लिंग, कपिलेश्वर धाम से तिल्हेश्वर तक गूंजा बोल बम

Published: Mon, 24 Aug 2026 03:56 PM (IST)

सुपौल में सावन की अंतिम सोमवारी पर 81 फीट की भव्य कांवड़ यात्रा निकाली गई, जिसमें 12 ज्योतिर्लिंगों को आकर्षक ...और पढ़ें

कांवड़ ले जाते कांवड़िये। फोटो जागरण

कांवड़ ले जाते कांवड़िये। फोटो जागरण

HighLights

  1. सावन की अंतिम सोमवारी पर भव्य कांवर यात्रा।

  2. 81 फीट लंबी कांवर में सजे 12 ज्योतिर्लिंग।

  3. कपिलेश्वर धाम से तिलेश्वर महादेव तक भक्तिमय माहौल।

जागरण संवाददाता, सुपौल। सावन की अंतिम सोमवारी पर सदर प्रखंड के बरुआरी स्थित हरिद्रा नदी के कपिल मुनि तट पर अवस्थित तपोभूमि बाबा कपिलेश्वर महादेव धाम में सोमवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

कांवड़ या संघ बरैल-सिमरा-जगतपुर की ओर से इस अवसर पर 81 फीट लंबी भव्य कांवड़ तैयार की गई। कांवड़ में देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों के मंदिर एवं प्रतिमाओं को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। विशाल कांवड़ श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

कांवड़ उठाने के लिए संघ के करीब 100 से अधिक कांवड़ ए जल लेकर यात्रा पर निकले। इनके साथ डीजे साउंड, घोड़े और मोटरसाइकिल सवार भी चल रहे थे।

कांवड़ या संघ ने कपिलेश्वर महादेव धाम से जल लेकर सुखपुर स्थित बाबा तिलेश्वर महादेव स्थान पर जल अर्पित करने का संकल्प लिया था। कांवड़ यात्रा के साथ हजारों श्रद्धालु कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। पूरे मार्ग में हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

बाबा कपिलेश्वर महादेव धाम में कांवड़ की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने बाबा पर जलाभिषेक किया तथा भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

कांवड़ या संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण मुखिया, संचालक सैनी सदा, कोषाध्यक्ष विदेशी शर्मा, कांवड़ मिस्त्री बैसाखी शर्मा, सदस्य भगों मुखिया, रामप्रसाद मुखिया सहित अन्य सदस्यों ने यात्रा की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संघ के सदस्यों ने बताया कि इस भव्य कांवड़ को तैयार करने में करीब एक माह से सभी सदस्य जुटे हुए थे। सभी के सामूहिक सहयोग और श्रम से 81 फीट की कांवड़ को आकर्षक स्वरूप दिया गया।

कांवड़ या संघ की ओर से प्रत्येक वर्ष सावन की अंतिम सोमवारी पर अलग-अलग स्थानों से कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा में बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे भी उत्साह के साथ शामिल होते हैं।

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