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बांस की खेती से बढ़ेगी सिवान के किसानों की आय, प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये तक अनुदान

Published: Mon, 12 Oct 2026 04:12 PM (GMT+05:30)

सिवान जिले में राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसानों को बांस की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये ...और पढ़ें

बांस की खेती से बढ़ेगी सिवान के किसानों की आय, प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये तक अनुदान (AI Generated Image)

बांस की खेती से बढ़ेगी सिवान के किसानों की आय, प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये तक अनुदान (AI Generated Image)

HighLights

  1. राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बांस की खेती को प्रोत्साहन।

  2. किसानों को प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये तक का अनुदान।

  3. बांस आधारित उद्योगों और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

जागरण संवाददाता, सिवान। जिले में कृषि आधारित रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बांस की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत इस योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।

इसका उद्देश्य उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने के साथ बांस उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आमदनी में वृद्धि करना है। योजना के तहत बांस की खेती करने वाले किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा।

जिला उद्यान पदाधिकारी विपिन कुमार पोद्दार ने बताया कि राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसान बांस की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। योजना में बांस की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 36 हजार रुपये तक अनुदान देने का प्रविधान है।

किसान न्यूनतम 10 डिसमिल से अधिकतम 50 डिसमिल भूमि पर बांस की खेती कर अनुदान का लाभ उठा सकते हैं। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय के नए विकल्प अपनाने का अवसर मिलेगा।

बांस आधारित उद्योगों को भी मिलेगा बढ़ावा

योजना के तहत बांस की खेती को बढ़ावा देने के साथ इससे जुड़ी गतिविधियों के विस्तार पर भी जोर दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्षेत्र प्रभारी, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी, कृषि समन्वयक और किसान सलाहकारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वहीं, बांस से संबंधित हस्तशिल्पकारों, कारीगरों और उद्यमियों को भी प्रशिक्षित करने की योजना है। इससे बांस आधारित उत्पादों के निर्माण और कारोबार को प्रोत्साहन मिलेगा।
जिला उद्यान पदाधिकारी ने बताया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है। बांस उत्पादन और इससे संबंधित रोजगारपरक गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे किसानों के साथ बांस से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।