नेपाल में भारतीय वाहनों पर कस्टम लागू, बालेन सरकार के फैसले से सीमा पर आक्रोश; गृहमंत्री को ज्ञापन
भारत-नेपाल सीमा पर भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों पर नेपाल में भंसार अनिवार्य करने के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है। ...और पढ़ें

नेपाल में भारतीय वाहनों पर कस्टम लागू, बालेन सरकार के फैसले से सीमा पर आक्रोश; गृहमंत्री को ज्ञापन

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संवाद सहयोगी, सोनबरसा (सीतामढ़ी)। भारत-नेपाल सीमा पर वर्षों से चले आ रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों के बीच अब एक नया विवाद खड़ा होता दिख रहा है।
भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों पर नेपाल (India Vehicle Rules In Nepal 2026) में भंसार अनिवार्य (Nepal Custom For India News) करने के खिलाफ सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में सर्लाही जिले के मलंगवा के माध्यम से नेपाल सरकार के गृहमंत्री को एक ज्ञापन भेजा गया है।
कोड़ेना गांव पालिका के मेयर रूपेश कुमार के नेतृत्व में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इसमें सरकार के हालिया निर्णय पर गहरी चिंता जताई गई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि भारत और नेपाल के बीच केवल एक अंतरराष्ट्रीय सीमा ही नहीं, बल्कि सदियों पुराना धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ता भी जुड़ा हुआ है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच विवाह, व्यापार और दैनिक आवागमन हमेशा से सहज और निर्बाध रहा है।
विशेष रूप से विवाह के दौरान भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहन दहेज के रूप में मिलने की परंपरा का भी जिक्र करते हुए कहा गया कि ऐसे वाहनों का सीमित क्षेत्र में उपयोग लंबे समय से होता आया है, जिस पर कभी कोई विवाद नहीं रहा।
25 किलोमीटर तक आवागमन की परंपरा पर असर
ज्ञापन में बताया गया कि सीमावर्ती नागरिक वर्षों से 25 किलोमीटर तक स्वतंत्र रूप से आवागमन करते रहे हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती रही हैं, लेकिन नए प्रतिबंध के कारण न केवल लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, बल्कि आपसी संबंधों में भी कड़वाहट आने की आशंका बढ़ गई है।
ज्ञापन में नेपाल सरकार से आग्रह किया गया है कि वह इस फैसले पर गंभीरता से पुनर्विचार करे और भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों को सीमित क्षेत्र में पहले की तरह चलने की अनुमति प्रदान करे।
'दोनों देशों के नागरिकों पर पड़ेगा फैसले का असर'
मेयर रूपेश कुमार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो इसका असर दोनों देशों के नागरिकों के बीच वैवाहिक संबंधों, सामाजिक सौहार्द और दैनिक जीवन पर नकारात्मक रूप से पड़ेगा।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यह प्रतिबंध केवल वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, सामाजिक ताना-बाना और आपसी विश्वास भी प्रभावित होगा।
लोगों ने सरकार से अपील की है कि वह जनता की भावनाओं को समझते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय ले, ताकि भारत-नेपाल के बीच सदियों से चले आ रहे रिश्तों की गर्माहट बनी रहे।
सीमावर्ती इलाकों में उठी यह आवाज अब एक बड़े मुद्दे का रूप लेती जा रही है। इससे पहले, कई पार्टी के नेता भी बैठक कर भारतीय वाहनों पर सख्ती के खिलाफ सरकार को चेतावनी दे चुके हैं।
देखना होगा कि नेपाल सरकार इस जनभावना को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या इस फैसले में बदलाव की कोई संभावना बनती है या नहीं?
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