सीतामढ़ी की 14 साल की करिश्मा ने नेशनल वेटलिफ्टिंग जीता सिल्वर मेडल, देश के लिए पदक जीतना है सपना
सीतामढ़ी की 14 वर्षीय करिश्मा राज ने राष्ट्रीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर जिले का मान बढ़ाया है। डीएवी ...और पढ़ें
HighLights
14 वर्षीय करिश्मा राज ने जीता राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग रजत पदक।
भाई की प्रेरणा से शुरू किया भारोत्तोलन, देश के लिए जीतना है पदक।
बेटियों को अवसर मिले तो वे परिवार का गौरव बढ़ाती हैं।
अमित सौरभ, सीतामढ़ी। बेटियां घर की लक्ष्मी ही नहीं, परिवार का गौरव और समाज की पहचान भी बन सकती हैं। जरूरत है तो बस उनका हौसला बढ़ाने की। सीतामढ़ी के मेला रोड निवासी शिक्षक सुबोध राम और शिक्षिका साधना की बड़ी बेटी करिश्मा राज ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिखाया है।
महज 14 वर्ष की उम्र में उसने अपने सपनों की उड़ान भरनी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्तर की भारोत्तोलन प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर उसने परिवार के साथ पूरे जिले का मान बढ़ाया है। डीएवी स्कूल की नौवीं कक्षा की छात्रा करिश्मा का सपना अब भारोत्तोलन में करियर बनाकर देश के लिए पदक जीतना है।
भाई की प्रेरणा से शुरू हुआ सफर
करिश्मा के खेल सफर की शुरुआत बड़े भाई आयुष की प्रेरणा से हुई। भाई से प्रोत्साहन पाकर उसने भारोत्तोलन को अपनाया और स्कूली प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया।
30 किलोग्राम भार वर्ग में उसने पहले महाराजगंज में आयोजित क्लस्टर स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। इसके बाद सिवान में हुई जोनल स्तरीय प्रतियोगिता में भी सिल्वर मेडल हासिल किया।

लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर उसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। नोएडा में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर उसने अपनी मेहनत को उपलब्धि में बदल दिया।
दोनों बेटियां खेल के मैदान में बढ़ा रहीं परिवार का गौरव
करिश्मा की छोटी बहन आर्या अदिति भी बास्केटबाल खेलती है। दोनों बहनें खेल के अलग-अलग मैदानों में अपनी प्रतिभा निखार रही हैं। शिक्षक पिता और शिक्षिका मां के लिए बेटियों की उपलब्धियां गर्व का विषय हैं। करिश्मा की सफलता यह संदेश देती है कि बेटियों को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे अपनी मेहनत से नई पहचान बना सकती हैं।
खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाना समाज की जिम्मेदारी
जिला भारोत्तोलन संघ के अध्यक्ष अतुल कुमार ने कहा, “करिश्मा जैसी बेटियां जिले की खेल प्रतिभा की पहचान हैं। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना बड़ी उपलब्धि है। उसे निरंतर अभ्यास, उचित मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिलें तो वह आगे और बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। अन्य अभिभावकों को भी बेटियों की खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करना चाहिए।”

संघ के सचिव सतीश कुमार ने कहा, “करिश्मा की उपलब्धि दूसरी बेटियों के लिए प्रेरणा है। खेल में सफलता प्रतिभा के साथ अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास से मिलती है। बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर देना जरूरी है। करिश्मा अपने प्रदर्शन से साबित कर रही है कि बेटियां हर क्षेत्र में परिवार और जिले का नाम रोशन कर सकती हैं।”
करिश्मा के लिए यह रजत पदक मंजिल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की शुरुआत है। उसका सपना भारोत्तोलन में अपनी पहचान बनाना और देश के लिए पदक जीतना है। उसकी कहानी सचमुच बताती है—लाडो को मौका मिले, तो वह परिवार का मान बढ़ाने के साथ समाज का गौरव भी बनती है।
