Bihar News : एक रुपये 50 पैसे की दुर्गापूजा, आज दो देशों में बिखेर रही आस्था का रंग
India Nepal Border : सीतामढ़ी सुरसंड की ऐतिहासिक दुर्गापूजा, जो 1947 में मात्र डेढ़ रुपये के खर्च से शुरू हुई ...और पढ़ें

Cross Border Devotion : सीतामढ़ी के सुरसंड में बाबा गरीब नाथ मंदिर परिसर में बना रहा पूजा पंडाल। जागरण
HighLights
1947 में डेढ़ रुपये से शुरू हुई ऐतिहासिक दुर्गापूजा।
बाबा गरीब नाथ मंदिर, भारत-नेपाल सीमा पर आस्था का केंद्र।
हजारों कन्याओं की मंगल शोभा यात्रा, नेपाली श्रद्धालु भी शामिल।
चंद्र किशोर सक्सेना, सुरसंड (सीतामढ़ी) । Durga Puja History : भारत-नेपाल सीमा पर स्थित राजा सूरसेन की ऐतिहासिक नगरी सुरसंड का बाबा गरीब नाथ इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और सांप्रदायिक सौहार्द के अनुपम रंगों में सराबोर है।
देश की आजादी के साथ ही शुरू हुई यहां की दुर्गापूजा
वर्ष 1947 में देश की आजादी के साथ ही शुरू हुई यहां की दुर्गापूजा आज इस पूरे सीमावर्ती क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। इस ऐतिहासिक पूजा की नींव उत्तरप्रदेश के बलिया टावर चौक से आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े दो सगे भाइयों राम और लक्ष्मण ने रखी थी।
उस दौर में जब संसाधन बेहद सीमित थे तब दोनों भाइयों ने बांस की खपचियों (जाफरी) और टाट-बोरे (चट्टी) से एक साधारण सा पंडाल तैयार किया। उसी साधारण पंडाल में मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूरे दस दिनों तक विधि-विधान और संपूर्ण भक्ति भाव से मां जगदम्बा की आराधना की गई।
पहली बार एक रुपये पचास पैसे का खर्च आया था
सबसे दिलचस्प और ऐतिहासिक पहलू यह है कि वर्ष 1947 में आयोजित इस पूजा पर कुल एक रुपये पचास पैसे का खर्च आया था। यह राशि राम लक्ष्मण दोनों भाइयों ने शाखा में आने वाले स्वयंसेवकों से साप्ताहिक एक पैसा, दो पैसा चंदा कर एकत्रित किया था। समय बीतने के साथ इस आयोजन का स्थान और स्वरूप दोनों बदला।
वर्ष 1950 में स्थानीय संत महंत कमल दास जी के मार्ग दर्शन और आग्रह पर इस पूजा को रकम बाजार से स्थानांतरित कर बाबा गरीबनाथ मंदिर परिसर में आयोजित किया जाने लगा।
तब से लेकर आज तक बाबा गरीबनाथ परिसर में आस्था, विश्वास और भक्ति की अनवरत बारिश होती आ रही है। समय के साथ व्यवस्था की कमान नई पीढ़ियों के हाथों में आती गई और पूजा का ढांचा भी भव्यता हासिल करता गया। पूजा के दौरान सांस्कृतिक मनोरंजन हेतु ''दुर्गा नाट्य परिषद'' की स्थापना की गई।
वर्तमान में इस पूजा समिति का कुशल नेतृत्व अध्यक्ष महंत शोभा दास, उपाध्यक्ष सह जेपी सेनानी रामस्वर्थ पासवान, सचिव सह पूर्व वार्ड पार्षद अशोक कुमार चौधरी, उप सचिव संगीता देवी, कोषाध्यक्ष प्रहलाद कुमार सुमन।
मुख्य पूजक सह नगर पंचायत अध्यक्ष पप्पू कुमार चौधरी ,वार्ड पार्षद सह पूर्व सचिव कुंदन कुमार,पूर्व पैक्स अध्यक्ष संजय पासवान,फिल्म अभिनेता अमित राज,वार्ड पार्षद वशिष्ठ साह,उमाशंकर कापर,वार्ड पार्षद प्रतिनिधि बलिराम मंडल,अजय बारीक,संतोष कुमार शोले संभाल रहे हैं।
वर्ष 1996 से सप्तमी तिथि को हजारों कन्याओं द्वारा विशाल मंगल शोभा यात्रा भी लगातार निकाली जा रही है।इसमें अलग-अलग रथों पर मां दुर्गा के नौ रूपों की भव्य एवं मनमोहक झांकी भी निकाली जाती है।
दो दिन पूर्व ही भारत-नेपाल बार्डर के खुल जाने से नेपाली श्रद्धालु भी उमड़ते हैं। सुरसंड प्रखंड और आसपास के दर्जनों गांवों के अलावा नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के सैकड़ों नेपाली नागरिक भी रोजाना मां भगवती के दर्शन और पूजन के लिए सुरसंड पहुंचते हैं।
