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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 22, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रामबाग बावन बीघा मेले के अस्तित्व पर संकट

By JagranEdited By:
Published: Sun, 22 Apr 2018 01:03 AM (IST)

चोरौत रामबाग के बावन बीघा में दशकों से लगने वाले प्रसिद्ध वैशाखी व माघी बैल मेला का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है।

रामबाग बावन बीघा मेले के अस्तित्व पर संकट
रामबाग बावन बीघा मेले के अस्तित्व पर संकट

सीतामढ़ी। चोरौत रामबाग के बावन बीघा में दशकों से लगने वाले प्रसिद्ध वैशाखी व माघी बैल मेला का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। अब काफी कम संख्या में पशुओं के आने तथा खरीद-बिक्री कम होने से इसकी उपयोगिता खत्म हो रही है। यहां साल मे दो बार क्रमश: वसंत पंचमी व जुड़ शीतल में एक पखवारा तक मेला लगता है। इस बार जुड़ शीतल के अवसर पर बैशाखी मेला में हजारों की जगह सैकड़ों की संख्या में ही बैल लेकर व्यापारी पहुंचे हैं। व्यापारियों की मानें तो अब मेला में नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। मेला में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल से ट्रकों से उन्नत नस्ल बैल लाए जाते थे। बिहार के बाहर के कई व्यापारियों ने बताया कि हम लोग दशकों से चोरौत के माघी व वैशाखी मेला में बछड़ा को लेकर आते हैं। लेकिन अब बिक्री नाम मात्र की होती है। अब घाटा उठाकर मवेशियों को लौटाकर ले जाना पड़ता है। पड़ोसी देश नेपाल से भी सैकड़ों व्यापारी व किसान अपनी टायरगाड़ी एवं बैलगाड़ी के साथ बैल लेकर चोरौत पशु हाट आते थे । लेकिन अब बॉर्डर पर पशुओं को लाने- ले जाने पर रोक लगा दी गई है। मशीनीकरण के इस युग में खेती ट्रेक्टर के साथ अन्य उपकरणों से होने लगी है । घंटों का काम मिनटों में हो जाता है। खेती के लिए बैलों की उपयोगिता कम हो गई। इसका असर बैल की खरीद-बिक्री पर पड़ा। इधर, मेला की जमीन पर स्थानीय लोगों की नजर भी लग गई। मेला की जमीन का चोरों ओर से अतिक्रमण किया जा रहा है।

चोरौत महंत के बाबा ने की थी मेला की शुरुआत

चोरौत महंत आनंद कंद दास जी महाराज के बाबा स्व. रामलखन दास ( निधन 1948) ने ही

वर्ष 1900 से पहले से ही अपनी जमीन रामबाग में बैल व घोड़े की बाजार की शुरूआत की थी। जहां तरह-तरह के पेड़-पौधे लगे थे। यहां साल में दो बार क्रमश: वसंत पंचमी व जुड़ शीतल में 15 दिनों का मेला लगाया जाता है । इन मेलों में खेती से संबंधित उपकरण, लोहे से निर्मित दुकान, लकड़ी से निर्मित दुकान के साथ ही रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता था। लेकिन अब यह सब अतीत बन चुका है।

क्या कहते हैं अधिकारी:

चोरौत पशुहाट के अधिकारी सीओ राजेन्द्र पाठक ने बताया कि पिछले वर्ष बैल मेला से 75 हजार रुपये का राजस्व वसूला गया था । लेकिन इस बार शून्य नजर आ रहा है। लोग बैल पालना छोड़ रहे हैं। ट्रैक्टर से खेती होती है। नेपाल से भी बैल आना बंद हो गया है। जिससे मेला सिमटता जा रहा है।