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बिहार के सरकारी स्कूलों में फिर गूंजेगा कबड्डी..कबड्डी, पारंपरिक खेलों से माहौल होगा बेहतर

Published: Wed, 21 Oct 2026 05:23 PM (IST)

Bihar Government Schools Sports Fund: बिहार शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे छात्रों का शारीरिक-मानसिक विकास होगा और पढ़ाई का माहौल सुधरेगा।

विद्यालयों को उनकी श्रेणी और विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर 5 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक की राशि दी जाएगी।

विद्यालयों को उनकी श्रेणी और विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर 5 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक की राशि दी जाएगी।

HighLights

  1. सरकारी स्कूलों में पारंपरिक खेलों को मिलेगा बढ़ावा।

  2. खेल सामग्री के लिए 5 से 25 हजार रुपये का बजट।

  3. हर महीने पारंपरिक खेल गतिविधियां होंगी अनिवार्य।

जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। Traditional Games Bihar Schools: बिहार के शिक्षा विभाग की ओर से एक ओर जहां राज्य के युवाओं की खेल प्रतिभाओं को उभारने की लगातार कोशिश चल रही है, वहीं दूसरी ओर विलुप्त हो रहे पारंपरिक खेलों को सहेजने और नई पीढ़ी को इनसे जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

इससे न केवल विद्यार्थियों का शारीरिक व मानसिक विकास होगा, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल भी और अधिक सुदृढ़ होगा।

खेल सामग्री को बजट

इसी भावना के अनुरूप शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में खेल सामग्री खरीदने के लिए विशेष राशि का निर्धारण कर दिया है।

इसके तहत विद्यालयों को उनकी श्रेणी और विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर 5 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक की राशि दी जाएगी।

विद्यालय स्तर पर समिति

खेल सामग्री की खरीद में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर स्कूल में एक विशेष खेल समिति गठित करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवदीप शुक्ला ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को पत्र जारी किया है।

श्रेणियों के अनुसार बजट

समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2026-27 के तहत खेल एवं शारीरिक शिक्षा मद से यह बजट आवंटित किया जाएगा।

इसके तहत प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार, प्रारंभिक व मध्य विद्यालयों को 10 हजार और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।

पारंपरिक खेलों पर जोर

विद्यालयों में कबड्डी, खो-खो और गिल्ली-डंडा समेत तमाम भारतीय व स्थानीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया है।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय को महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से पारंपरिक खेलकूद गतिविधियां आयोजित करनी होंगी।

गुणवत्ता और रखरखाव

खेल सामग्री की खरीद से पहले स्कूलों में उपलब्ध इनडोर और आउटडोर सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। सामग्री के रखरखाव की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित शारीरिक शिक्षक या नामित नोडल शिक्षक की होगी, जबकि गुणवत्ता और वित्तीय मानकों की पूरी जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की तय की गई है।

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