शेखपुरा जिले के घाटकुसुंभा को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग, दूसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी
सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल और अमीर राज मंडल की घाटकुसुंभा को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही।

भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीण। फोटो जागरण
HighLights
घाटकुसुंभा को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग पर भूख हड़ताल।
पप्पू राज मंडल, अमीर राज मंडल की भूख हड़ताल का दूसरा दिन।
विधायक और विधान पार्षद ने मुख्यमंत्री से मिलकर समस्या बताई।
जागरण संवाददाता, शेखपुरा। घाटकुसुंभा प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल और अमीर राज मंडल की भूख हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही।
भूख हड़ताल के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई जिम्मेदार पदाधिकारी आंदोलित लोगों से मिलने नहीं पहुंचा। हालांकि बुधवार दोपहर सरकारी चिकित्सकों की टीम ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर दोनों के स्वास्थ्य की जांच की।
उधर, भूख हड़ताल का असर भी देखने को मिला। स्थानीय जदयू विधायक और विधान पाषर्द ने मुख्यमंत्री से मिलकर मांग रखी। मंगलवार की आधी रात गश्ती कर रही पुलिस टीम भी आंदोलन स्थल पर पहुंची और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के बारे में जानकारी ली।
पुलिस ने इसकी सूचना वरीय पदाधिकारियों को दी। बुधवार को भी पप्पू राज मंडल और अमीर राज मंडल के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग आंदोलन स्थल पर पहुंचे और उनके साथ धरने पर बैठे।
पप्पू राज मंडल ने बताया कि भूख हड़ताल शुरू करने से पहले सभी संबंधित पदाधिकारियों को लिखित सूचना दी गई थी। इसके बावजूद अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी बातचीत के लिए नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पूरे घाटकुसुंभा प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित किए जाने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।
इधर, घाटकुसुंभा को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर शेखपुरा विधायक रणधीर कुमार सोनी और विधान पार्षद ललन प्रसाद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने पटना स्थित लोक सेवक आवास में मुख्यमंत्री को घाटकुसुंभा प्रखंड में बाढ़ की स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने समस्या को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
बता दें कि हरोहर नदी की बाढ़ से नदी के दोनों ओर के क्षेत्र प्रभावित होते हैं। लखीसराय जिले की ओर के प्रभावित क्षेत्र को बाढ़ग्रस्त मानकर राहत दी जाती है, जबकि शेखपुरा की ओर के क्षेत्र को जलजमाव वाला क्षेत्र बताकर बाढ़ राहत से वंचित रखा जाता है।
