यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
तरछा मिडिल स्कूल में आठ सौ छात्रों पर चार कमरे
शेखपुरा। प्रशासन की आंख के सामने संचालित है शेखपुरा का तरछा मिडिल स्कूल। यह स्कूल आजादी से पहले का है। यहां अभी पांचवी पीढ़ी शिक्षा ग्रहण कर रही है।

शेखपुरा। प्रशासन की आंख के सामने संचालित है शेखपुरा का तरछा मिडिल स्कूल। यह स्कूल आजादी से पहले का है। यहां अभी पांचवी पीढ़ी शिक्षा ग्रहण कर रही है। यहां से पढ़कर निकलने वाले कई देश के विभिन्न हिस्सों में महत्वपूर्ण पद पर रहकर देश और समाज की सेवा कर चुके हैं। मगर इस विद्यालय के भवन की स्थिति काफी बदहाल है। विद्यालय के किसी कमरे में बाहरी हवा और रोशनी नहीं पहुंचती है। किसी कमरे में धूप नहीं आती। कुल मिलाकर कहें तो शिक्षा का यह मंदिर विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों के लिए भी किसी यातनागृह सरीखा है। विद्यालय में जगह की भारी कमी है। यहां पहली से आठवीं तक की कक्षा चलती है और आठ सौ से अधिक विद्यार्थी हैं, मगर कमरे सिर्फ चार हैं। विद्यालय के मौजूदा कमरों की स्थिति अब जर्जर हो गई है। खेल-कूद की गतिविधियां तो दूर स्कूल में सामूहिक प्रार्थना तक की जगह नहीं है। बच्चे अपनी कक्षाओं में ही प्रार्थना करते हैं। अधिकारी और नेता विद्यालय के आगे से गुजरते हैं,मगर अभी तक किसी ने इसकी दुर्दशा को निहारने तक की जरूरत नहीं समझी। कई बार अधिकारी को लिखा
स्कूल की इस स्थिति को लेकर कई बार पदाधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। हेडमास्टर कुंदन कुमार बताते हैं कि कक्षाओं में रोशनी के लिए बल्ब जलाना पड़ता है। गर्मी और बरसात के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है। बाहरी हवा नहीं मिलने से कई बार विद्यार्थियों और शिक्षकों की तबियत स्कूल में ही बिगड़ चुकी है। जरूरत है इस विद्यालय के भवन का नये सिरे से निर्माण का।
