शिवहर। (सुनील कुमार गिरि): विकास की तस्वीर देखनी हो तो गांवों का रुख करना होगा। वहां के हालात ही विकास के मापदंड होंगे। इसमें कोई दो राय नहीं कि सरकार प्रायोजित योजनाओं का सही से क्रियान्वयन हो जाए तो फिर तस्वीर ही बदल जाएगी, कितु ऐसा देखने को कम ही मिलता है। आज भी गांवों में समस्याओं की भरमार है। सड़क, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताएं जब की तस बनी हैं। यह अलग बात है कि सरकारी आंकड़ों में विकास का दर बढ़ता दिखाई देता है। गांव की पाती अभियान के तहत दैनिक जागरण टीम मेसौढ़ा पंचायत मुख्यालय पहुंची। जो प्रखंड मुख्यालय से महज आधे किलोमीटर पर स्थित है। कायदे के मुताबिक इस गांव का सर्वांगीण विकास कब का हो जाना चाहिए था कितु यह गांव अभी भी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति में जुटा है। आयोजित चौपाल में शामिल लोगों ने एक- एक कर परेशानियां बताईं। सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पेयजलापूर्ति को लेकर दिखी। आधे पंचायत अर्थात छह वार्डों में बड़े वाले जलमीनार से पानी आना है शेष सात वार्डों के लिए नए बोरिग एवं एवं जलमीनार की व्यवस्था है। पाइप बिछाई जा चुकी है टोंटियां भी दिखती हैं लेकिन पानी के आज तक दर्शन नहीं है। यहां का रकवा सात सौ एकड़ बताया गया वहीं जानकारी मिली कि एक भी नलकूप नहीं है। जबकि अधिकांश लोग कृषि पर आधारित है। विडंवना यह भी कि यहां के किसी एक किसान का भी नाम कृषि सम्मान योजना में नाम नहीं है। दूसरी समस्या सड़क की है। गांव से गांव को जोड़ती सड़कें खस्ताहाल हैं। बीते बाढ़ ने उसे और भी खराब ही किया है। यहां के किसान बागमती के उस पार खेती-बाड़ी के लिए जाते हैं जिनके आने-जाने में भारी परेशानी है। वर्षों से एक अदद सरकारी नाव की मांग की जा रही है कितु इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। बागमती के तटबंध को जोड़ने वाली सड़क जर्जर है जिसका निर्माण तो दूर मरम्मत भी नहीं हुई। मेसौढा पंचायत 2015 में ही ओडीएफ घोषित किया गया लेकिन बाढ़ एवं बारिश के कारण करीब सत्तर फीसद शौचालय ध्वस्त हो गए। स्थिति फिर से पूर्व की भांति हो चुकी है।

बिजली की बात करें तो पोल तार दिखाई जरुर देते हैं पर बिजली ठहरती नहीं है है। अलबत्ता आती जाती दिखाई देती है। जबकि किसानों को उम्मीद थी और है भी कि बिजली हो तो सूखते खेतों की सिचाई कर धान सहित अन्य फसलों को बचा सकें। लेकिन यह भी एक सपना ही बन गया है। कृषि कनेक्शन के लिए 25 से अधिक आवेदन विभाग को दिए जा चुके हैं लेकिन विभाग की अनदेखी से एक भी कनेक्शन कृषि कार्य हेतु नहीं किया गया है। नतीजतन खेतों की समुचित सिचाई संभव नहीं है। किसानों की कई समस्याएं हैं जिसमें कृषि लोन का नहीं दिया जाना भी एक है। गांव का क्षेत्रीय बैंक को- ऑपरेटिव बैंक है जिसने आज तक किसी भी किसान को लाभान्वित करना जरुरी नहीं समझा है। ऋण के लिए लोग बैंकों का चक्कर काटते नजर आते हैं। दूसरी अहम जरूरत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की है। कहने को पंचायत में करीब दर्जन भर सरकारी स्कूल हैं लेकिन पढ़ाई बस एक रस्म अदायगी भर है। सरकारी स्कूल में सरकारी तर्ज पर होनेवाली पढ़ाई से बच्चों में शैक्षणिक विकास एक भूल कही जाएगी। हाई स्कूल नहीं होने से बच्चे पिपराही या फिर अंबा हाई स्कूल का रुख करते हैं। खासकर बच्चियों को मैट्रिक तक की पढ़ाई के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं चिकित्सा सेवा का हाल भी बदतर है। पिपराही पीएचसी पर इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को बाहर के अस्पतालों में बस रेफर किया जाता है। आज के चौपाल में शामिल विनोद सिंह, पप्पू कुमार, राघवेन्द्र कुमार सिंह, नीतीश कुमार, अजय कुमार सिंह, मुकेश कुमार, संजीत साह, रामएकबाल साह, संतोष कुमार सिंह, बिगूल साह, विजय साह, गुप्ता साह, जयकिशोर साह, वार्ड सदस्य फेंकू साह एवं रामकलेवर सिंह ने अपनी बातें रखीं। क्या कहती हैं मुखिया पंचायत की वर्तमान मुखिया रानी सिंह कहती हैं कि पंचायत में मनरेगा योजना के तहत बहुतेरे विकास कार्य पूरे किए गए हैं। सड़क निर्माण, पुल पुलिया निर्माण, मिट्टी भराई सहित अन्य कार्य विकास को लक्ष्य कर किए गए हैं जो अभी भी जारी है। वहीं सरकार की तमाम योजनाओं का पारदर्शिता के साथ क्रियान्वयन किया गया है। 75 फीसद योग्य लाभुकों को पीएम आवास योजना का लाभ दिया गया है शेष प्रक्रियाधीन है। वहीं सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित अन्य पेंशन का लाभ योग्य लाभुकों को दिया जा रहा है। समाजसेवी मुकुल सिंह का कहना है कि पंचायत में विकासात्मक कार्य हो रहे हैं, आगे भी होते रहेंगे। लेकिन सबसे अहम है शुद्ध पेयजल की आपूर्ति। इस दिशा में विभाग एवं जिला प्रशासन को गंभीरता दिखाने की जरूरत है। वहीं बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत एवं ध्वस्त शौचालयों का निर्माण भी बहुत जरूरी है। इसके बिना स्वच्छता अभियान अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकेगा। ग्रामीण नरेन्द्र तिवारी ने बताया कि विकास की बड़ी बड़ी बातें कही जाती है कितु धरातल पर समस्याएं जस की तस हैं। न पीने को शुद्ध पानी है न चलने को मुकम्मल सड़क। किसानों को बिजली नहीं मिलती। गरीब और भी गरीब हो रहे हैं। किसी को पीएम आवास नहीं मिला तो कोई पेंशन का कागज लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। स्कूल में पढ़ाई नहीं होती हॉस्पिटल में इलाज नहीं होता। आखिर ये स्थिति कब बदलेगी। इसके लिए कौन जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।

मेसौढ़ा पंचायत: एक झलक - कुल आबादी 12 हजार 500

- कुल मतदाता: 7 हजार 200

- बीपीएल: 3200

- एपीएल: 2500

- अंत्योदय लाभार्थी: 70

- जन वितरण प्रणाली दुकान: 05

- मध्य विद्यालय: 03

- प्राथमिक विद्यालय 05

- मध्य विद्यालय: 03

- हाई स्कूल: 00

- अस्पताल

Posted By: Jagran

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