शिवहर। महानगरों में मजदूरी करने वाले प्रवासी अब गांव की तस्वीर और अपनी तकदीर बदलने में लगे है। डीएम सज्जन राजशेखर के निर्देश पर प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध करा उनकी जिदगी में खुशियों के रंग भरने की पहल जारी है। इसके तहत डीडीसी के निर्देशन में कमरौली पंचायत में प्रवासी और स्थानीय मजदूरों ने पांच किमी लंबी पईन के निर्माण की शुरूआत की है। पईन निर्माण में 50 मजदूर लगे है। इनमें दस से अधिक प्रवासी मजदूर है जो कोरोना की वजह से दिल्ली से अपने गांव लौटे है। डीएम द्वारा प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा के तहत काम देने के आदेश का लाभ दिल्ली से लोटे इन मजदूरों को रोजगार के रूप में मिला है तो पईन निर्माण के जरिए गांव की तस्वीर बदली है। इस पईन के निर्माण से जहां वर्षा जल का संरक्षण होगा, वहीं बारिश का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचकर हरियाली का वाहक बनेगा। इससे इलाके के सैकड़ों किसान भी लाभन्वित होंगे। मनरेगा पीओ कुणालय पंकज और बीएफसी अब्दुल मलिक के निर्देशन में मजदूरों का दल पूरे जोश से काम करने में लगे है। महानगरों में काम करने वाले फौलादी हाथ अपने हाथों में कुदाल और टोकड़ी थाम अब गांव के विकास के लिए पसीना बहा रहे है। बदले में सरकार द्वारा उन्हें मजदूरी दी जा रही है। मनरेगा पीओ ने बताया कि, कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए यहां काम कराया जा रहा है। इस काम में महिला मजदूर भी शामिल है। निर्माण स्थल पर दो गज की दूरी का पालन कराया जा रहा है। साथ ही हाथों की धुलाई और सैनिटाइजिग भी कराया जा रहा है।

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डीएम और सरकार के प्रति जताया आभार

शिवहर : मनरेगा के तहत जारी पईन निर्माण कार्य में कमरौली पंचायत के कमरौली और हरकरवा के रहने वाले मजदूर मेहनत कर रहे है। इनमें नेयाज अंसारी, वाजूल अंसारी, इरशाद अंसारी, अजीम अंसारी, मेराज अंसारी, शमसे आलम, मो. सलामुद्दीन, शहाबुद्दीन अंसारी, मो. अलीशेर अंसारी व वली आजम अंसारी आदि, गांव में काम मिलने से खासे उत्साहित है। डीएम और मुखिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इन लोगों ने कहा कि, अब गांव की मिट्टी में ही उम्मीदों का फूल खिलाएंगे। कहा कि, गांव में ही काम मिल रहा है तो परदेस जाने की जरूरत क्या हैं। बताते चलें कि, ये मजदूर पुरानी दिल्ली के इलाके में एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनी के लिए सिलाई का काम करते थे। लॉकडाउन के बाद काफी जहमत के बाद ये अपने गांव लौटे। सफर के दौरान आगे की चिता इन्हें खाए जा रही थी। लेकिन गांव पहुंचते ही प्रशासन ने इन्हें रोजगार देकर जिदगी की राह आसान कर दी।

Edited By: Jagran