सारण। आस्था व श्रद्धा के साथ रविवार को शहर से लेकर गांव में श्रद्धालु नर-नारियों ने अनंत चतुर्दशी व्रत की। व्रत को लेकर महिलाएं व पुरुषों ने अहले सुबह पापनाशिनी गंगा व सरयू नदी में स्नान किया और घर आकर भगवान अनंत (श्री कृष्ण)की कुश की प्रतिमा बनाकर पूरे विधि विधान से पूजा-अर्चना किया। कर्मकांडी पंडित से कथा श्रवण कर उन्हें दान दिया। महिलाएं बायें हाथ एवं पुरुषों ने दायें हाथ में चौदह गाठ वाला अनंत का डोरा बांधा। उसके बाद पुआ-पूड़ी व सेवई का सेवन किया। ऐसी मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस व्रत में दिन भर निर्जला रह कर दोपहर में कथा श्रवण कर एक बार ही अन्न ग्रहण किया जाता है। इसके बाद जल भी नहीं लिया जाता है। दूसरे दिन सुबह उठकर स्नान ध्यान कर तुलसी गंगा जल से पारण किया जाता है। पंडित संपत कुमार मिश्र ने बताया कि अनंत चतुर्दशी व्रत कलयुग में बहुत फल देने वाला होता है। इसे आस्था के साथ करने से सभी इच्छा पूर्ण होती है। व्रत करने सभी कष्ट दूर हो जाते है और रिद्धि, सिद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है पांडव ने जुआ में जब सब कुछ हार गये थे तो भगवान श्री कृष्ण के कहने पर द्रोपदी समेत पांडव ने अनंत चतुर्दशी का व्रत कर अनंत डोरा बांधा था। जिसे उनका राज्य व धन व यश वैभव वापस मिल गया। अनंत चतुर्दशी के दिन मंदिरों में भी पूजा-अर्चना की गयी। विप्र जन कथा का वाचन किये। शहर के मौना वानगंज, स्थित माहामाया स्थान मंदिर, मौना नीम स्थित हनुमान मंदिर, दौलत गंज स्थित बटुकेश्वर नाथ मंदिर, प्रभुनाथ नगर स्थित शिव शक्ति मंदिर में अनंत चतुर्दशी की कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी।

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