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सारण में वेतन घोटाले के 70 मामलों में 62.28 लाख की पूरी वसूली, फिर भी डीईओ से जवाब-तलब; सात दिनों की मोहलत

By amritesh kumarEdited By: Radha Krishna
Published: Fri, 06 Nov 2026 07:14 PM (IST)

सारण जिले में शिक्षा विभाग के वेतन भुगतान में अनियमितता के 70 मामलों में 62.28 लाख रुपये की पूरी वसूली ...और पढ़ें

HRMS पोर्टल पर छेड़छाड़ से अधिक भुगतान का आरोप

HRMS पोर्टल पर छेड़छाड़ से अधिक भुगतान का आरोप

HighLights

  1. सारण में 70 वेतन अनियमितता मामलों में पूरी वसूली।

  2. एचआरएमएस पोर्टल छेड़छाड़ से अधिक भुगतान का आरोप।

  3. डीईओ से सात दिनों में जवाबदेही पर स्पष्टीकरण मांगा।

जागरण संवाददाता, छपरा(सारण)। सारण जिले में शिक्षा विभाग के वेतन भुगतान में अनियमितता के मामले में पूरी राशि की वसूली होने के बावजूद अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया जारी है। एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से वेतन, मकान किराया भत्ता और एरियर मद में निर्धारित सीमा से अधिक राशि की निकासी के 70 मामले सामने आए थे।

इन सभी मामलों में 62 लाख 28 हजार 238 रुपये की शत-प्रतिशत वसूली कर ली गई है। हालांकि, राशि वापस मिलने के बाद भी विभाग ने मामले को समाप्त नहीं माना है।

शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पांडेय ने सारण के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) से सात दिनों के भीतर साक्ष्य सहित बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा है।

70 मामलों में 62.28 लाख की शत-प्रतिशत वसूली

विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार, सारण जिले में निर्धारित राशि से अधिक निकासी के कुल 70 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में कुल 62 लाख 28 हजार 238 रुपये की वसूली की जानी थी।

विभागीय आंकड़ों में पूरी राशि वापस होने की पुष्टि की गई है। इसके साथ ही वसूली का प्रतिशत 100 दर्ज किया गया है। अब विभाग का जोर केवल सरकारी राशि की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने पर भी है कि अनियमित भुगतान किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं।

HRMS पोर्टल पर छेड़छाड़ से अधिक भुगतान का आरोप

विभागीय पत्र में कहा गया है कि एचआरएमएस पोर्टल पर कथित छेड़छाड़ और कूटरचना के जरिये वेतन, मकान किराया भत्ता तथा एरियर मद में निर्धारित सीमा से अधिक राशि की निकासी की गई।

इस पूरे प्रकरण में मेकर, चेकर और अप्रूवर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। विभाग ने इसे वित्तीय नियमों और बिहार कोषागार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है। अब यह जांच का विषय है कि भुगतान की प्रक्रिया में निर्धारित जांच और स्वीकृति के स्तर पर अनियमितता कैसे हुई।

मेकर-चेकर-अप्रूवर की जिम्मेदारी भी होगी तय

वेतन भुगतान की प्रक्रिया में मेकर की जिम्मेदारी विपत्र तैयार करने, चेकर की जिम्मेदारी उसकी जांच करने और अप्रूवर की जिम्मेदारी अंतिम स्वीकृति देने की होती है।

ऐसे में तीनों स्तरों पर कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। विभाग यह जानना चाहता है कि निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया और अनियमित भुगतान को समय रहते रोका क्यों नहीं जा सका।

डीईओ की निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल

शिक्षा विभाग के निदेशक ने डीईओ को जिले का सर्वोच्च विभागीय पदाधिकारी और एचआरएमएस का जिला प्रशासक बताते हुए निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

पत्र में कहा गया है कि अधीनस्थ कर्मियों और संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों के स्तर पर ऐसी अनियमितता होना प्रशासनिक नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में गंभीर चूक को दर्शाता है। इसे बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1978 के नियम तीन के प्रतिकूल बताया गया है।

सात दिनों में बताना होगा, कार्रवाई क्यों न हो

विभाग ने डीईओ से पूछा है कि इस वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक निगरानी में कथित विफलता के लिए उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए।

इसके लिए पत्र प्राप्ति के सात दिनों के भीतर साक्ष्य सहित बिंदुवार जवाब देने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्पष्टीकरण में सभी आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

पूरी राशि लौटने के बाद भी जवाबदेही पर जोर

इस मामले में 62.28 लाख रुपये की पूरी वसूली हो चुकी है, लेकिन विभाग अब अनियमित निकासी की जिम्मेदारी तय करने पर ध्यान दे रहा है।

निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकतरफा निर्णय लेने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में डीईओ का स्पष्टीकरण और विभागीय जांच की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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