सारण में पेपरलेस रजिस्ट्री से निबंधन कार्यालयों में घटी रौनक, कातिबों ने जताई रोजगार की चिंता
सारण जिले में पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू होने के बाद कार्यालयों में आवेदकों की संख्या कम हुई है। कातिबों ने ...और पढ़ें

सारण में पेपरलेस रजिस्ट्री से निबंधन कार्यालयों में घटी रौनक, कातिबों ने जताई रोजगार की चिंता
HighLights
पेपरलेस निबंधन से सारण कार्यालयों में आवेदकों की कमी।
कातिबों ने रोजगार छिनने की आशंका पर विरोध जताया।
विभाग ने इसे नई व्यवस्था का शुरुआती चरण बताया।
जागरण संवाददाता, छपरा। निबंधन विभाग की नई पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद जिले के निबंधन कार्यालयों में जमीन और अन्य दस्तावेजों के निबंधन की प्रक्रिया फिलहाल धीमी नजर आ रही है।
पहले जहां कार्यालयों में दस्तावेज निबंधित कराने के लिए लोगों की भीड़ रहती थी, वहीं नई व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदकों की संख्या कम दिखाई दे रही है।
विभाग इसे नई प्रणाली को समझने और अपनाने का शुरुआती चरण बता रहा है। दूसरी ओर, दस्तावेज लेखकों यानी कातिबों ने इसे अपने पारंपरिक रोजगार के लिए चुनौती बताया है।
हेल्प डेस्क से ऑनलाइन प्रक्रिया की दी जा रही जानकारी
जिला अवर निबंधक अभिषेक सिंह ने बताया कि पेपरलेस निबंधन की प्रक्रिया सरल रखी गई है। आवेदकों की सहायता के लिए कार्यालय में हेल्प डेस्क बनाया गया है, जिसकी जिम्मेदारी राकेश कुमार को दी गई है। यहां से जानकारी लेने के बाद पक्षकार स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
निबंधन के दौरान संबंधित पक्षों को कार्यालय पहुंचकर निर्धारित सवालों का जवाब देना होगा। नई प्रक्रिया में गवाहों को साथ लाने की अनिवार्यता नहीं है। गवाह के आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
छह कार्यालयों में आवेदन की स्थिति अलग-अलग
सारण जिले में छपरा मुख्यालय के अलावा सोनपुर, परसा, मढ़ौरा, मशरक सहित कुल छह निबंधन कार्यालय हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, छपरा कार्यालय में लंबित सभी 18 आवेदन का निष्पादन किया जा चुका है। मंगलवार को यहां दो नए आवेदन प्राप्त हुए।
सोनपुर में एक और परसा में तीन आवेदन आए, जबकि मढ़ौरा और मशरक कार्यालय में फिलहाल कोई नया आवेदन नहीं मिला है। विभाग का कहना है कि व्यवस्था के प्रति लोगों की समझ बढ़ने के साथ आवेदन की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है।
कातिब बोले : ऑनलाइन व्यवस्था से रोजगार पर पड़ेगा असर
विभाग का दावा है कि पेपरलेस व्यवस्था से निबंधन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होगी। दस्तावेज डिजिटल रूप में संरक्षित रहेंगे तथा घर बैठे ऑनलाइन प्रविष्टि की सुविधा मिलेगी।
डिजिटल हस्ताक्षर, आधार आधारित बायोमेट्रिक पहचान और ओटीपी के जरिए प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए बिहार स्टाम्प सेवा अनुप्रमाणित एवं ई-स्टाम्प नियमावली, 2026 लागू की गई है।
इधर, कातिब संघ नई व्यवस्था का विरोध कर रहा है। संघ के सदस्य तीन अगस्त से कलमबंद हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन निबंधन से पारंपरिक रोजगार प्रभावित होगा।
साथ ही स्टाम्प शुल्क की राशि ग्राहक के बैंक खाते से विभाग तक पहुंचने की व्यवस्था में आयकर से जुड़ी अतिरिक्त जटिलताओं की आशंका भी जताई गई है।
संघ ने सरकार से नियमों में आवश्यक संशोधन कर कातिबों के रोजगार और उनके परिवार की आजीविका सुरक्षित करने की मांग की है।
यह भी पढ़ें- बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री लागू: अब हाथों-हाथ मिलेगा QR कोड वाला रंगीन दस्तावेज, बिचौलियों की छुट्टी
