Saran News: परसागढ़ के कांसा-पीतल उद्योग को मिलेगा नया संबल, कारीगरों को मिलेगी ट्रेनिंग
उद्योग विभाग ने सारण के एकमा प्रखंड स्थित परसागढ़ के पारंपरिक कांसा-पीतल उद्योग को पुनर्जीवित करने की पहल की है। ...और पढ़ें

परसागढ़ के कांसा-पीतल उद्योग को मिलेगा नया संबल, कारीगरों को मिलेगी ट्रेनिंग (AI Generated Image)

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संवाद सूत्र, रसूलपुर (सारण)। एकमा प्रखंड के परसागढ़ कसेरा टोला स्थित पारंपरिक कांसा-पीतल उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में उद्योग विभाग ने पहल शुरू कर दी है।
दैनिक जागरण में 11 अप्रैल 2026 को “जागरण आपके द्वार” अभियान के तहत कारीगरों की समस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद जिला उद्योग केंद्र सक्रिय हुआ है। इस पहल से स्थानीय कारीगरों में खुशी का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, सारण जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक ने परसागढ़ कांसा-पीतल उद्योग सहयोग समिति लिमिटेड के अध्यक्ष मनोज शर्मा को पत्र भेजकर पारंपरिक तरीके से काम कर रहे कारीगरों के लिए नई तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई है। पत्र में प्रशिक्षण लेने के इच्छुक लोगों की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है।
कारीगरों का कहना है कि आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षण मिलने पर वे नए डिजाइन और बेहतर गुणवत्ता वाले कांसा-पीतल के बर्तन तैयार कर सकेंगे। साथ ही यदि कच्चा माल और बाजार की सुविधा मिले तो गांव में ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन की समस्या भी कम होगी।
कारीगरों ने कहा कि वर्षों से इस उद्योग से जुड़े परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें नई उम्मीद दिखाई दे रही है।
कारीगर विनोद कसेरा, शिवनाथ कसेरा, गोकुलचंद कसेरा, काशीनाथ कसेरा, मदन शर्मा, जितेंद्र कसेरा, मोहन कसेरा, मुक्तिनाथ कसेरा, राज साह और वेदप्रकाश शर्मा समेत कई लोगों ने दैनिक जागरण की टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के बाद प्रशासन का ध्यान इस ओर गया है।
उनका मानना है कि प्रशिक्षण और बैंक से पूंजी मिलने पर सैकड़ों परिवारों को गांव में ही रोजगार मिलेगा तथा युवाओं का पलायन रुकेगा।
समिति अध्यक्ष मनोज शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए इच्छुक कारीगर आधार कार्ड और फोटो जमा कर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। 25 मई तक सूची तैयार कर उद्योग विभाग को भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से पारंपरिक कांसा-पीतल उद्योग को नई पहचान मिलेगी और कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
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