हनुमान बाहुक के पाठ से दूर होते हैं शारीरिक कष्ट, मिलती है रोगों से लड़ने की शक्ति; कैसे करें पाठ और क्या हैं इसके लाभ
छपरा के मारुति मानस मंदिर में हनुमज्जयंती पर स्वामी शारदानंद सरस्वती ने हनुमान बाहुक की महिमा बताई। उन्होंने इसके पाठ ...और पढ़ें

आठ नवंबर को निकलेगी हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा
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हनुमान बाहुक तुलसीदास द्वारा रचित शक्तिशाली स्तुति है।
इसके पाठ से मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
छपरा में स्वामी शारदानंद सरस्वती ने महिमा बताई।
जागरण संवाददाता, छपरा(सारण)। छपरा के मारुति मानस मंदिर में आयोजित 59वें श्री हनुमज्जयंती वार्षिकोत्सव में हनुमान बाहुक की महिमा पर विशेष प्रवचन हुआ। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से आए शक्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शारदा स्वामी शारदानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को हनुमान बाहुक की रचना, उसके आध्यात्मिक महत्व और पाठ की परंपरा के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि हनुमान जी की आराधना व्यक्ति को मानसिक संबल, आत्मविश्वास और संकटों से जूझने की प्रेरणा देती है। सनातन परंपरा में हनुमान बाहुक को विशेष स्तुति के रूप में माना गया है।
क्या है हनुमान बाहुक और किसने की थी इसकी रचना?
हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध स्तुति है। इसमें हनुमान जी की महिमा, शक्ति, करुणा और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का वर्णन मिलता है।
परंपरागत मान्यता के अनुसार, तुलसीदास जी ने इसे उस समय लिखा था, जब वे भुजा की असहनीय पीड़ा से परेशान थे। कहा जाता है कि उन्होंने बजरंगबली की शरण लेकर उनकी स्तुति में 44 छंदों की रचना की। यही रचना आगे चलकर हनुमान बाहुक के नाम से प्रसिद्ध हुई।
हनुमान बाहुक का पाठ क्यों किया जाता है?
प्रवचन के दौरान स्वामी शारदानंद सरस्वती ने बताया कि हनुमान बाहुक केवल एक धार्मिक स्तुति नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और आत्मबल का माध्यम भी है।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से शारीरिक कष्टों के समय मानसिक शांति और सकारात्मकता मिलती है। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है।
इसलिए भक्त कठिन परिस्थितियों, बीमारी और मानसिक परेशानी के समय उनकी आराधना करते हैं। हालांकि, पाठ को आध्यात्मिक साधना के रूप में देखना चाहिए, चिकित्सा उपचार के विकल्प के रूप में नहीं।
हनुमान बाहुक का पाठ कैसे करें?
हनुमान बाहुक का पाठ करने के लिए किसी विशेष कठिन विधि की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा, स्वच्छता और एकाग्रता को इसका प्रमुख आधार माना जाता है।
- स्नान और स्वच्छता: सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और शांत स्थान पर बैठें।
- पूजा स्थल तैयार करें: हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
- श्रीराम का स्मरण करें: सबसे पहले भगवान श्रीराम और हनुमान जी का ध्यान करें।
- संकल्प लें: मन में अपनी प्रार्थना और पाठ का उद्देश्य रखें।
- हनुमान बाहुक का पाठ करें: पुस्तक या प्रमाणित पाठ के माध्यम से सभी छंदों का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
- हनुमान चालीसा या राम नाम: पाठ के बाद हनुमान चालीसा अथवा श्रीराम नाम का स्मरण कर सकते हैं।
- आरती और प्रार्थना: अंत में हनुमान जी की आरती करके सुख-शांति की कामना करें।
किस दिन और कितनी बार करना चाहिए पाठ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान बाहुक का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
कई श्रद्धालु इन दिनों विशेष रूप से हनुमान बाहुक का पाठ करते हैं। हालांकि, इसके लिए कोई अनिवार्य समय या निश्चित संख्या निर्धारित नहीं है। अपनी सुविधा के अनुसार नियमित रूप से पाठ करना और उसके भाव को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।
हनुमान बाहुक के पाठ से क्या मिलते हैं लाभ?
हनुमान बाहुक के पाठ को भक्त कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभों से जोड़कर देखते हैं।
- मानसिक शांति: श्रद्धा के साथ पाठ करने से मन को एकाग्र करने और तनाव के समय शांति पाने में मदद मिल सकती है।
- आत्मविश्वास में वृद्धि: हनुमान जी के पराक्रम और भक्ति का स्मरण व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
- सकारात्मक विचार: नियमित धार्मिक पाठ से सकारात्मकता और आशावादी सोच को बढ़ावा मिल सकता है।
- भय और चिंता से मुक्ति का भाव: हनुमान जी को संकटमोचन मानकर उनकी आराधना करने से श्रद्धालुओं को मानसिक संबल मिलता है।
- भक्ति भावना मजबूत होती है: हनुमान बाहुक के माध्यम से भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रति श्रद्धा गहरी होती है।
- अनुशासन और एकाग्रता: नियमित पाठ से दिनचर्या में धार्मिक अनुशासन और ध्यान की आदत विकसित हो सकती है।
तुलसीदास जी की पीड़ा से जुड़ी है हनुमान बाहुक की कथा
स्वामी शारदानंद सरस्वती ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी एक समय भुजा की गंभीर पीड़ा और फोड़े-फुंसियों की समस्या से परेशान थे।
परंपरागत कथा के अनुसार, जब उन्हें उपचार से अपेक्षित राहत नहीं मिली तो उन्होंने हनुमान जी की आराधना की। इसी दौरान उन्होंने बजरंगबली की स्तुति में हनुमान बाहुक की रचना की।
धार्मिक मान्यता है कि इस स्तुति से उन्हें राहत मिली। इसी वजह से श्रद्धालु हनुमान बाहुक को कष्ट के समय विशेष श्रद्धा के साथ पढ़ते हैं।
सात नवंबर तक चलेगी प्रवचन माला
छपरा के मारुति मानस मंदिर में चल रहे 59वें ग्यारह दिवसीय वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार को प्रवचन माला का शुभारंभ हुआ।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से आए जगद्गुरु शारदा स्वामी शारदानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद से पहुंचे वैराग्यानंद जी परमहंस ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। दोनों संतों ने मंदिर के मुख्य पुजारी राघव तिवारी के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
आठ नवंबर को निकलेगी हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा
समारोह के तहत सात नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर और शाम को प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। 30 अक्टूबर से प्रतिदिन हनुमान जी का गोदुग्ध से अभिषेक, सामूहिक रामचरितमानस पाठ और वैदिक हवन किया जा रहा है।
सात नवंबर को सहस्रनाम पूजन, राम राज्याभिषेक, दीपमाला और जन्मोत्सव का आयोजन होगा। इसके अगले दिन आठ नवंबर की सुबह हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
कार्यक्रम में मंदिर के सचिव सतनारायण शर्मा, प्रधान सचिव संगीता सिंह, चंद्रभूषण सिंह, बासुदेव नारायण वर्मा, सरोज सिंह, अनिरुद्ध सिंह, ललित कुमार, रितेश कुमार और रजनीश कुमार समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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