छपरा सदर अस्पताल का कारनामा: चोट पर पट्टी की जगह बांध दिया कार्टन, गंभीर हालत में मरीज पटना रेफर
छपरा सदर अस्पताल में सड़क हादसे में घायल दो युवकों के जख्मों पर पट्टी की जगह दवा की पैकिंग वाला कार्टन बांधकर उन्हें पटना रेफर कर दिया गया।
HighLights
घायल युवकों के जख्म पर पट्टी की जगह कार्टन बांधा गया।
गंभीर हालत में दोनों मरीजों को छपरा से पटना रेफर किया गया।
अस्पताल की प्राथमिक उपचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
जागरण संवाददाता, छपरा। छपरा सदर अस्पताल में सोमवार को सड़क हादसे में घायल दो युवकों के उपचार का तरीका चर्चा में आ गया। गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों के जख्म पर पट्टी की जगह दवा की पैकिंग वाला कार्टन बांधकर उन्हें पटना रेफर कर दिया गया।
घटना ने अस्पताल में उपलब्ध प्राथमिक उपचार की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, कार्टन किस परिस्थिति में बांधा गया, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
लाल बाजार के पास हुआ हादसा
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लाल बाजार के समीप ट्रक और बाइक की टक्कर में दो युवक घायल हो गए। दोनों छपरा में शैडोफैक्स कंपनी में डिलीवरी ब्वाय हैं।
घायलों की पहचान डोरीगंज थाना क्षेत्र के मोहदीपुर गांव निवासी रंजीत चौरसिया के 24 वर्षीय पुत्र अविनाश कुमार और बदलपुर निवासी अमर सिंह के 28 वर्षीय पुत्र राहुल कुमार सिंह के रूप में हुई है।
गंभीर हालत में पटना भेजा
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने दोनों को सदर अस्पताल पहुंचाया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. सुब्रत कुमार ने प्राथमिक उपचार किया।
दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पटना रेफर कर दिया गया। स्वजन के अनुसार हादसे में दोनों को कई जगह चोटें आई थीं।
जख्म पर कार्टन बांधने से सवाल
प्राथमिक उपचार के दौरान चोट वाले स्थान पर दवा की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला कार्टन बांधा गया। इसके बाद दोनों को पटना भेज दिया गया।
मरीज के जख्म पर कार्टन बांधे जाने की बात सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
सामान्य स्थिति में चोट के उपचार के लिए चिकित्सकीय ड्रेसिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कार्टन के इस्तेमाल की वजह और परिस्थितियां जांच का विषय हैं।
सुविधाओं के दावे के बीच अजब इंतजाम
सदर अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। यहां 75 प्रकार के आपरेशन की सुविधा होने की भी बात कही जाती है।
इसके बावजूद सड़क हादसे के गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करने और जख्म पर कार्टन बांधने की स्थिति व्यवस्था की पड़ताल की जरूरत बताती है।
हालांकि, पटना रेफर करना चिकित्सकीय निर्णय था या नहीं, इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है। सवाल सिर्फ यह है कि रेफर किए जाने से पहले मरीजों को किस तरह की प्राथमिक चिकित्सा और ड्रेसिंग उपलब्ध कराई गई।
जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई
सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. केएम दुबे ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि मरीजों को निर्धारित मानक के अनुसार उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी है।
