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Bihar MLC Election Result 2026: सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय राहुल राज का धमाका, भाजपा से बगावत कर NDA को दिया बड़ा झटका

By rajeev ranjanEdited By: Radha Krishna
Published: Wed, 28 Oct 2026 12:00 PM (IST)

बिहार विधान परिषद चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. राहुल राज ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत ...और पढ़ें

डॉ. राहुल राज

डॉ. राहुल राज

HighLights

  1. निर्दलीय राहुल राज ने सारण शिक्षक सीट जीती।

  2. भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़े।

  3. एनडीए समर्थित प्रत्याशी को 1815 मतों से हराया।

जागरण संवाददाता, छपरा(सारण)। बिहार विधान परिषद चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम राजनीतिक दलों के लिए कई संदेश लेकर आया है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले डॉ. राहुल राज ने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 1815 मतों से हरा दिया।

दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद उनकी जीत तय हुई। इस परिणाम ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के प्रभाव के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और शिक्षकों के मुद्दों की अहमियत को फिर चर्चा में ला दिया है।

टिकट कटा तो निर्दलीय मैदान में उतरे राहुल राज

डॉ. राहुल राज भाजपा में प्रदेश स्तर पर पदाधिकारी रह चुके हैं। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।

इस कदम के बाद भाजपा ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बावजूद राहुल राज ने चुनाव मैदान में अपनी दावेदारी बनाए रखी और अंततः जीत हासिल की।

पहली वरीयता के मतों में भी बनाई थी बढ़त

मतगणना के पहले चरण में ही राहुल राज अन्य प्रत्याशियों से आगे थे। उन्हें पहली वरीयता के 2723 मत मिले, जबकि जदयू के आनंद पुष्कर को 2440, जन सुराज के आफाक अहमद को 1999 और राजद के प्रो. जयराम यादव को 1708 मत प्राप्त हुए।

कोई भी प्रत्याशी निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सका, जिसके कारण दूसरी वरीयता के मतों की गिनती करनी पड़ी।

दूसरी वरीयता की गिनती में 1815 मतों से जीत

अंतिम परिणाम में राहुल राज को कुल 4965 मत मिले, जबकि आनंद पुष्कर के खाते में 3150 मत आए। इस तरह राहुल राज ने 1815 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

जन सुराज के आफाक अहमद को 2454 मत मिले, जबकि राजद के प्रो. जयराम यादव को 1708 मत प्राप्त हुए। परिणाम से स्पष्ट हुआ कि राहुल राज की बढ़त पहली वरीयता की गिनती से ही बनी हुई थी।

भाजपा और एनडीए के लिए क्या है सियासी संदेश?

राहुल राज की जीत एनडीए के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि भाजपा से जुड़े रहे एक नेता ने टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़कर एनडीए समर्थित प्रत्याशी को हरा दिया।

हालांकि, इस नतीजे को केवल भाजपा के खिलाफ नाराजगी का परिणाम मानना सही नहीं होगा। पहली वरीयता के मतों में राहुल राज की बढ़त बताती है कि उन्हें चुनाव की शुरुआत से ही पर्याप्त समर्थन मिल रहा था। उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहुंच और शिक्षकों के बीच स्वीकार्यता भी इस परिणाम के संभावित कारणों में शामिल हैं।

89 प्रतिशत से अधिक मतदान, शिक्षकों ने दिखाया उत्साह

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 89.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 10,748 पंजीकृत मतदाताओं में से 9,570 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

मतदान में शिक्षकों की बड़ी भागीदारी ने चुनाव को महत्वपूर्ण बनाया। राहुल राज की जीत के बाद शिक्षक मतदाताओं की प्राथमिकताओं और उनके मुद्दों पर राजनीतिक दलों का ध्यान फिर केंद्रित हुआ है।

सातवें वेतनमान और लंबित मांगों पर रहेगी नजर

चुनाव के दौरान राहुल राज ने शिक्षकों की समस्याओं और लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया था। सातवें वेतनमान को लागू कराने की मांग भी उनके एजेंडे में शामिल रही।

जीत के बाद उन्होंने शिक्षकों का आभार जताते हुए उनकी मांगों को विधान परिषद में उठाने का भरोसा दिया। अब उनके सामने चुनाव के दौरान किए गए वादों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याएं, वेतनमान और लंबित मांगें उनके कामकाज की अहम कसौटी बनेंगी।

निर्दलीय प्रत्याशियों की मजबूत मौजूदगी

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवारों की सफलता पहले भी चर्चा में रही है। वर्ष 2023 के उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी आफाक अहमद ने जीत दर्ज की थी।

इस बार वह जन सुराज के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन जीत राहुल राज के हिस्से आई। यह परिणाम दिखाता है कि इस निर्वाचन क्षेत्र में किसी बड़े दल का समर्थन अपने आप जीत सुनिश्चित नहीं करता।

जन सुराज और राजद के लिए भी नतीजे में संदेश

इस चुनाव में जन सुराज के प्रत्याशी आफाक अहमद तीसरे स्थान पर रहे, जबकि राजद के प्रो. जयराम यादव चौथे स्थान पर रहे। आफाक अहमद को 2454 और जयराम यादव को 1708 मत मिले।

नतीजे से यह सवाल भी उठता है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच दलों के समर्थन के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान और स्थानीय संपर्क कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।

सारण शिक्षक सीट पर नए समीकरण की चर्चा

राहुल राज की जीत ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों पर नई बहस छेड़ दी है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उनका निर्दलीय चुनाव जीतना दलों के लिए उम्मीदवार चयन और स्थानीय स्तर पर समर्थन का महत्व रेखांकित करता है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि राहुल राज विधान परिषद में शिक्षकों की समस्याओं को किस तरह उठाते हैं और अपने चुनावी वादों को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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