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बिहार: बाढ़ में पशु की मौत पर सरकार देगी ₹37500 तक मुआवजा, जानिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया

Published: Mon, 14 Sep 2026 02:22 PM (IST)

सरकार ने बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं में पशुधन की क्षति होने पर पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान ...और पढ़ें

साकंतिक तस्वीर

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HighLights

  1. प्राकृतिक आपदा में पशुधन क्षति पर मिलेगी सरकारी सहायता।

  2. पशु की मृत्यु पर निर्धारित प्रक्रिया से करना होगा आवेदन।

  3. एक सप्ताह में भुगतान, विभिन्न पशुओं के लिए अलग राशि।

जागरण संवाददाता, छपरा। बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदा में पशुधन की क्षति होने पर पशुपालकों को अब आर्थिक सहायता मिल सकेगी। सरकार ने पशुओं की मौत पर सहाय्य अनुदान देने का प्रावधान किया है।

इसके लिए पशुपालक को पशु की मृत्यु के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। जिला प्रशासन की ओर से पशुपालकों को आपदा में पशु क्षति होने पर तत्काल संबंधित पदाधिकारी को सूचना देने को कहा गया है।

शव मिला तो पशु चिकित्सा पदाधिकारी को दें सूचना

पशु की मृत्यु के बाद यदि शव उपलब्ध है तो पशुपालक को इसकी सूचना निकटतम पशु चिकित्सा पदाधिकारी को देनी होगी। इसके साथ निर्धारित प्रपत्र-क में आवेदन करना होगा।

आवेदन को मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच, पंच या वार्ड सदस्य से अग्रसारित कराना होगा। इसके बाद पशु चिकित्सा पदाधिकारी आवेदन को अंचलाधिकारी के पास भेजेंगे। अंचलाधिकारी प्रतिवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।

शव नहीं मिला तो थाने में दर्ज कराएं सनहा

बाढ़ या अन्य आपदा में पशु का शव नहीं मिलने पर पशुपालक को स्थानीय थाने में पशु क्षति के संबंध में सनहा या प्राथमिकी दर्ज करानी होगी। सनहा या प्राथमिकी की प्रति के साथ अंचलाधिकारी को आवेदन देना होगा।

इसके बाद राजस्व कर्मचारी या अन्य कर्मी से पशु क्षति की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अंचलाधिकारी अनुदान की स्वीकृति के लिए आगे की कार्रवाई करेंगे।

जांच के बाद एक सप्ताह में भुगतान

अंचलाधिकारी पशु क्षति से संबंधित सूचना जिला पदाधिकारी को उपलब्ध कराएंगे। आवश्यक जांच के बाद अभिलेख स्वीकृत होने पर घटना के एक सप्ताह के अंदर सहाय्य अनुदान के भुगतान का प्रावधान है।

सुखाड़, वज्रपात और अग्निकांड जैसी आपदाओं में यथासंभव अंत्य परीक्षण कराना आवश्यक होगा। एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में पशुओं की मौत होने पर पांच से दस प्रतिशत पशुओं का नमूना आधार पर अंत्य परीक्षण कर मृत्यु का कारण निर्धारित किया जाएगा।

अलग-अलग पशुओं के लिए अलग राशि

दुग्धकारी गाय, भैंस, ऊंट, याक और मिथुन आदि की मृत्यु पर 37,500 रुपये प्रति पशु की सहायता मिलेगी। यह अधिकतम तीन पशुओं तक सीमित होगी। बकरी, भेड़ और सूकर के लिए 4,000 रुपये प्रति पशु की दर से अधिकतम 30 पशुओं तक सहायता दी जाएगी।

बैल, ऊंट और घोड़ा आदि भारवाही पशुओं की मृत्यु पर 32,000 रुपये प्रति पशु, अधिकतम तीन पशुओं तक अनुदान मिलेगा। वहीं बछड़ा, खच्चर और गदहा के लिए 20,000 रुपये प्रति पशु, अधिकतम आठ पशुओं तक सहायता का प्रावधान है।

पाल्ट्री में 100 रुपये प्रति पक्षी, अधिकतम 5,000 रुपये तथा अग्निकांड में घर से जुड़े पशु शेड के लिए 3,000 रुपये प्रति शेड सहायता दी जाएगी।

आवेदन में पशुपालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, मृत पशु का विवरण, मृत्यु का कारण और बैंक खाते की जानकारी देना अनिवार्य होगा। फार्म जिला पशुपालन कार्यालय और भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी या प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी के कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।

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