टाल में सिर्फ दाल नहीं उगेगी, कारोबार भी पकेगा; लखीसराय समेत बिहार 10 जिलों में दाल मिलों पर 25 लाख तक अनुदान
Bihar Pulse Processing Unit Scheme: बिहार सरकार ने दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 10 जिलों में आधुनिक दाल प्रसंस्करण इकाइयां ...और पढ़ें

Bihar Pulse Processing Unit Scheme: फतुहा से लखीसराय तक सजेगा दाल का बाजार: उत्पादन तिगुना करने का लक्ष्य, 33% अनुदान पर दाल मिल लगाने का मौका
HighLights
10 जिलों में दाल प्रसंस्करण इकाइयां होंगी स्थापित।
₹25 लाख तक का सरकारी अनुदान मिलेगा।
किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
जागरण संवाददाता, लखीसराय। Bihar Pulse Processing Unit Scheme: बिहार के 'दाल के कटोरे' के रूप में विख्यात ऐतिहासिक बड़हिया-मोकामा टाल क्षेत्र की पहचान अब सिर्फ दलहन की बंपर पैदावार तक सीमित नहीं रहेगी। टाल में अब केवल दाल उगेगी ही नहीं, बल्कि इसका वृहद कारोबार भी पकेगा। टाल में पैदा होने वाली उच्च गुणवत्ता की मसूर, चना, मटर और खेसारी को अब प्रोसेसिंग के लिए राज्य से बाहर भेजने की मजबूरी समाप्त होने जा रही है।
बिहार सरकार ने दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक दाल प्रसंस्करण इकाइयां (दाल मिलें) स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना लागू की है। इसके लिए लखीसराय सहित राज्य के 10 प्रमुख जिलों का चयन किया गया है। इस दूरगामी पहल से बिहार में खेत से लेकर बाजार और रसोई तक तैयार दाल की एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) विकसित होगी।
राजधानी से सटे फतुहा से शुरू होकर बाढ़, मोकामा, बड़हिया होते हुए लखीसराय तक फैला यह टाल क्षेत्र राज्य का प्रमुख दलहन उत्पादक हब है। आर्थिक और कृषि सर्वेक्षणों के अनुसार, राज्य के कुल दलहन उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी भूभाग से आता है। बरसात के दिनों में जलमग्न रहने वाला यह विशाल क्षेत्र रबी सीजन में रबी फसलों और दलहन से पूरी तरह गुलजार हो जाता है। अब इसी प्राकृतिक उपज को वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों को कच्ची उपज औने-पौने दामों में बेचने की विवशता से मुक्ति मिलेगी।
उत्पादन तीन गुना करने का लक्ष्य, 10 जिलों में स्थापित होंगी मिलें
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 में राज्य के 4.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुवाई हुई थी, जिससे 3.93 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हासिल हुआ। कृषि विभाग ने इस आंकड़े को आगे बढ़ाते हुए दलहन का रकबा 9.19 लाख हेक्टेयर और कुल उत्पादन 11.27 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया है। उत्पादन में इस तिगुनी वृद्धि को खपाने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए प्रसंस्करण व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। लखीसराय के अलावा इस योजना के तहत नालंदा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, सुपौल, भागलपुर, सीतामढ़ी, जहानाबाद और गया जी को भी दाल मिल इकाइयों के लिए चयनित किया गया है।
बड़हिया-मोकामा से लखीसराय तक फैले टाल क्षेत्र में दाल उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को मिलेगा बढ़ावा
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन: लखीसराय, भागलपुर, सुपौल समेत राज्य के 10 जिलों में दाल प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना
योजना के तहत दाल मिल लगाने पर 33 प्रतिशत या अधिकतम 25 लाख रुपये तक का सरकारी अनुदान (सब्सिडी)
न्यूनतम 300 किग्रा प्रति घंटा प्रोसेसिंग क्षमता अनिवार्य; एफपीओ, पैक्स और उद्यमी 15 सितंबर 2026 तक कर सकते हैं आवेदन
जिले में ही सफाई, ग्रेडिंग, पॉलिशिंग, दाल तैयार करने और आकर्षक पैकेजिंग की सुविधा मिलने से उपज के बाजार भाव में सीधा उछाल आएगा। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार और एग्रो-बिजनेस के नए अवसर भी सृजित होंगे।
₹25 लाख तक अनुदान, 300 किग्रा प्रति घंटा होगी न्यूनतम क्षमता
कृषि विभाग की अधिसूचना के अनुसार, दाल प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर परियोजना लागत का 33 प्रतिशत या अधिकतम 25 लाख रुपये (जो भी कम हो) का पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा।
पात्रता: किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ), पैक्स (PACS), स्थानीय उद्यमी, 21 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तिगत युवा व पंजीकृत व्यावसायिक संस्थाएं आवेदन के पात्र हैं।
क्षमता व मानक: मिल की न्यूनतम प्रसंस्करण क्षमता 300 किलोग्राम प्रति घंटा निर्धारित की गई है। मशीनरी बीआईएस (BIS) मानकों के अनुरूप होनी चाहिए और इकाई को खाद्य सुरक्षा मानक (FSSAI) का अनिवार्य पालन करना होगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर छूट: मुख्य संयंत्र व मशीनरी के अलावा भवन और भंडारण गोदाम पर भी अनुदान मान्य होगा। भवन-गोदाम पर व्यय कुल स्वीकृत अनुदान के अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित रहेगा।
ऋण व वित्तीय शर्तें: आवेदक को परियोजना लागत का न्यूनतम 15 प्रतिशत स्वयं का अंशदान लगाना होगा और बैंक से ऋण लेना अनिवार्य होगा। भूमि खरीद, विद्युत कनेक्शन और मानव संसाधन पर कोई अनुदान देय नहीं होगा।
अनुदान की राशि लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। इच्छुक उद्यमियों और संस्थाओं के लिए विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
