सारण।

अनंत चतुर्दशी का त्यौहार भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के दिन यानि 27 सितंबर रविवार को है। इस दिन भगवान विष्णु की कुश के प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन अंत न होने वाले सृष्टि के कत्र्ता निगरुेष ब्राह्मा की भक्ति का भी दिन है। अनंत के दिन दोपहर में पूजा -अर्चना का विधान है। बेदी बनाकर कुमकुम हल्दी से उसे सजाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। सिर्फ एक बार भोजन किया जाता है। पंडित संपत कुमार मिश्र ने बताया कि महाभारत काल में जब पांडव धन संपत्ति गंवाकर वन में चले गये तो ऋषि मुनियों को देखने के बाद अनंत व्रत किया था। तब से लोग उसे करते आ रहे है। पूजा के बाद उस दिन व्रती समृति का चौदह गांठ वाला डोरा जिसे अनंत कहा जाता है उसे बाधते है। अनंत का डोरा बांधने से घर में धन-लक्ष्मी व समृद्धि एवं पुत्र की प्राप्ति होती है। इस दिन पूजा करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। पूजा के बाद पुराना वाला अनंत डोरा उतार कर ही नया डोरा बांधा जाता है। अनंत के डोरा को हल्दी व कुमकुम से रंग कर हाथ में बांधा जाता है। अनंत का चौदह गांठ चौदह लोकों के प्रतीक है। अनंत को लेकर बाजारों में शनिवार को भीड़ थी। एकमा एवं डोरीगंज समेत अन्य ग्रामीण अंचलों में अनंत को लेकर बाजार में भीड़ उमड़ी थी।

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप