बिहार में अब PDS दुकानों पर भी बनेगी ABHA ID, आशा कार्यकर्ता घर-घर पहुंचाएंगी सुविधा
स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए नई पहल की है। अब पीडीएस दुकानों, ...और पढ़ें

बिहार में अब पीडीएस दुकानों पर भी बनेगी ABHA ID (AI Generated Image)
HighLights
पीडीएस दुकानों और कामन सर्विस सेंटरों पर अब बनेगी आभा आईडी।
आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य खाते से जोड़ेंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने एबीडीएम के घटकों की मासिक समीक्षा का दिया निर्देश।
जागरण संवाददाता, छपरा। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) को गांव और पंचायत स्तर तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों और कामन सर्विस सेंटरों पर भी पात्र लोगों की आभा आईडी बनाई जाएगी।
वहीं, आशा कार्यकर्ता आशा व एम-आशा ऐप के माध्यम से घर-घर जाकर लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य खाते से जोड़ेंगी। विद्यालय, महाविद्यालय, जीविका, स्वयं सहायता समूह और आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित गतिविधियों के दौरान भी आभा निर्माण कराया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन को एबीडीएम के विभिन्न घटकों की प्रत्येक माह समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसमें आभा निर्माण के साथ स्वास्थ्य पेशेवर पंजी (एचपीआर), स्वास्थ्य सुविधा पंजी (एचएफआर) और एबीडीएम सक्षम अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली की प्रगति शामिल है।
सरकारी के अलावा निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, फार्मेसी और जांच केंद्रों को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
विभाग के अनुसार, आभा प्रत्येक नागरिक की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान होगी। इसके माध्यम से मरीज के स्वास्थ्य अभिलेख सहमति के आधार पर सुरक्षित तरीके से डिजिटल रूप से जोड़े जा सकेंगे।
अस्पतालों में ओपीडी व आईपीडी पंजीकरण के दौरान आभा आधारित पहचान सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेख तैयार करने की भी निगरानी होगी।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि एबीडीएम का उद्देश्य केवल आभा बनाना नहीं, बल्कि नागरिक, स्वास्थ्यकर्मी, संस्थान और मरीज के डिजिटल अभिलेख को एकीकृत व्यवस्था से जोड़ना है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
