कासं, छपरा : माओवादियों की धमकी के बाद नयागांव स्टेशन पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। इसके साथ ही डीआरएम के निर्देश पर जिले के अन्य स्टेशनों व हाल्ट की भी सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। आसपास के लोग भी इस धमकी से काफी सकते में हैं, क्योंकि यहां के लोगों ने मात्र तीन माह पूर्व ही माओवादियों की धमक को यहां साफ तौर पर महसूस किया था। उस समय सड़क निर्माण कंपनी के कई वाहनों को लेवी न देने पर माओवादियों ने आग के हवाले कर दिया था। लोगों में यह भय है कि कहीं इस घटना की पुनरावृत्ति करने में नक्सली यहां कामयाब तो नहीं हो जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि परसा से मंगलवार को हार्डकोर नक्सली व एरिया कमांडर चंदेश्वर सहनी उर्फ प्रहार की गिरफ्तारी के बाद से नक्सली खलबला गये हैं, क्योंकि चंदेश्वर सहनी न सिर्फ मारक दस्ते का सक्रिय सदस्य था, बल्कि संगठन के लिए लेवी वसूलने की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि माओवादी किसी भी घटना को अंजाम देने से पहले या बाद में पोस्टर व पंपलेट के माध्यम से भी सूचना देते हैं। परंतु यहां माओवादियों ने किसी प्रकार का न पोस्टर साटा है और न ही पंपलेट बांटा है। इसलिए कुछ लोग डीआरएम कंट्रोल रूम में फोन कर नयागांव स्टेशन उड़ाने की धमकी देने को असामाजिक तत्वों की करतूत भी बता रहे हैं। आरपीएफ कमांडेंट की भी सोच कुछ इसी तरह की है। परंतु रेल प्रशासन कोई जोखिम उठाना नहीं चाह रहा है। यही कारण है कि नयागांव के साथ-साथ अन्य स्टेशनों की भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है। छपरा जंक्शन व कचहरी स्टेशन पर डाग स्कवायड के माध्यम से तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है।

अपनी धमकी को अंजाम

तक पहुंचाते हैं नक्सली

कांस, छपरा : इससे पूर्व भी नक्सलियों ने करीब छह वर्ष पूर्व सारण जिले के राजापट्टी स्टेशन को उड़ाने की धमकी दी थी। उस समय जब इस धमकी की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दी गयी तो लोग इसे महज अफवाह बता रहे थे और इसे भी असामाजिक तत्वों की करतूत बता कर पल्ला झाड़ लिए थे, लेकिन धमकी के दो माह बाद नक्सलियों ने राजापट्टी स्टेशन के समीप रेलवे ट्रैक को डायनामाइट लगा उड़ा दिया था। उस समय नक्सलियों ने गोपालगंज से छपरा की ओर आ रही पैसेंजर ट्रेन को स्टेशन के पहले ही रोक दिया और राजापट्टी के तत्कालीन स्टेशन मास्टर को सूचित भी किया कि रेलवे ट्रैक पर डायनामाइट लगा दिया गया है। इस सूचना के कुछ देर बाद रेलवे ट्रैक को विस्फोट कर माओवादियों ने उड़ा दिया था। विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि रेलवे ट्रैक का ज्वाइंट प्लेट क्रैक कर गया था। उसके बाद से रेल प्रशासन व जिला पुलिस हरकत में आयी। इस बार भी माओवादियों ने जो धमकी दी है, उसे महज अफवाह समझ कर नजरअंदाज कर देना रेल प्रशासन को भारी भी पड़ सकता है।

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