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कागजों में 'कत्ल': समस्तीपुर में जिंदा रामजी सिंह का बन गया मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक खाता व राशन कार्ड बंद

Published: Fri, 22 May 2026 07:02 PM (GMT+05:30)

Alive Man Declared Dead: समस्तीपुर के मोरवा प्रखंड में रामजी सिंह को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया ...और पढ़ें

रामजी सिंह और उन का मृत्यु प्रमाण पत्र। फोटो सौजन्य : पीड़ित

रामजी सिंह और उन का मृत्यु प्रमाण पत्र। फोटो सौजन्य : पीड़ित

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जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। Morwa Block Administrative Negligence: कहते हैं कि इंसान सिर्फ एक बार मरता है, लेकिन समस्तीपुर के मोरवा प्रखंड में रहने वाले रामजी सिंह पिछले तीन सालों से हर दिन घुट-घुट कर मर रहे हैं।

वजह कोई बीमारी नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की वो संवेदनहीन 'लाल स्याही' है, जिसने एक झटके में उनके जिंदा होने का वजूद ही मिटा दिया।

आज रामजी सिंह हाड़-मांस के शरीर के साथ सरकारी दफ्तरों की चौखट पर खड़े होकर गुहार लगा रहे हैं— "हुजूर, मैं भूत नहीं हूँ... मैं जिंदा हूँ!" लेकिन फाइलें हैं कि उनके जीते-जी उन्हें 'मुर्दा' मानकर तमाशा देख रही हैं।

सिस्टम ने पिता को ही 'मार डाला'

यह अजीबोगरीब और दर्दनाक दास्तां मोरवा प्रखंड की धर्मपुर बांदे पंचायत (वार्ड संख्या 18) के रहने वाले रामजी सिंह की है। साल 2023 में रामजी सिंह पर दुखों का पहाड़ टूटा था, जब उनकी युवा पुत्री रेखा कुमारी की बीमारी के कारण असमय मौत हो गई।

बेटी की मौत के बाद उसके बैंक खाते में जमा करीब चार हजार रुपये निकालने के लिए बैंक ने मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) की मांग की।

गमजदा पिता रामजी सिंह ने साल 2023 में ही अपनी मृत बेटी का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 146 की सेविका पूनम कुमारी और अपने वार्ड सदस्य को सारे कागजात सौंपे थे।

लेकिन सिस्टम की लापरवाही का आलम देखिए; बाबू और कर्मियों ने मृत बेटी की जगह आवेदन देने वाले जीवित पिता का ही डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया। 27 फरवरी 2023 को जारी उस काले कागज पर साफ-साफ लिख दिया गया कि रामजी सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं।

धीरे-धीरे कटती गई जिंदगी की डोर

रामजी सिंह को इस खौफनाक सच का अंदाजा तब तक नहीं था, जब तक कि उनके जीवन की बुनियादी कड़ियां एक-एक कर टूटने नहीं लगीं।

सरकारी रिकॉर्ड में 'मृत' दर्ज होते ही डिजिटल इंडिया के ऑटोमेटेड सिस्टम ने अपना काम शुरू कर दिया। सबसे पहले रामजी सिंह का चालू बैंक खाता फ्रीज (बंद) कर दिया गया। इसके बाद उनके परिवार का पेट पालने वाला राशन कार्ड निष्क्रिय हो गया।

रही-सही कसर तब पूरी हो गई, जब उनकी पहचान का सबसे बड़ा दस्तावेज यानी आधार कार्ड भी सरकारी पोर्टल से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया।

तीन साल तक रामजी सिंह इस बात से बेखबर रहे कि आखिर अचानक उनके सारे अधिकार क्यों छीने जा रहे हैं। जब उन्होंने गहराई से पड़ताल की, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें पता चला कि वह अपनी ही बेटी की जगह कागजों पर 'मारे' जा चुके हैं।

बीडीओ साहब की जांच के भरोसे 'पुनर्जन्म'

शुक्रवार को रामजी सिंह अपनी ही 'मौत' का वो अजीबोगरीब प्रमाण पत्र लेकर मोरवा प्रखंड कार्यालय पहुंचे। जिंदा इंसान को अपने सामने देख वहां मौजूद हर शख्स हैरान रह गया।

रामजी सिंह ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को आवेदन सौंपकर न्याय की भीख मांगी है और खुद को कागजों पर दोबारा 'जिंदा' करने की गुहार लगाई है।

यह मामला बेहद गंभीर है और हमारे संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जांच में आंगनबाड़ी सेविका या जो भी कर्मी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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अरुण कुमार निराला, प्रखंड विकास पदाधिकारी, मोरवा