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145 साल पुराने समस्तीपुर रेल कारखाने को नया रूप देने की तैयारी, 2.42 करोड़ रुपये से होगा मरम्मत कार्य

Published: Wed, 28 Oct 2026 12:15 PM (IST)

समस्तीपुर रेल कारखाने का 2.42 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जो 1881 में स्थापित 145 ...और पढ़ें

समस्तीपुर रेल कारखाना

समस्तीपुर रेल कारखाना

HighLights

  1. 145 साल पुराने समस्तीपुर रेल कारखाने का जीर्णोद्धार शुरू।

  2. 2.42 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक मरम्मत कार्य जारी।

  3. कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाएं और कार्यस्थल का विकास।

जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। आज के समय में जहां हाल ही में बने पुल और सरकारी भवन उद्घाटन से पहले या शुरुआती कुछ वर्षों में ही जर्जर होकर ढह जाते हैं या पांच साल के भीतर ही बार-बार मरम्मत की मांग करते हैं, वहीं अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1881 में स्थापित यह 145 साल पुराना रेल कारखाना आज भी लोहे के मजबूत पिलरों और एस्बेस्टस के सहारे पूरी तरह सुरक्षित है।

भाप इंजन की मरम्मत से शुरू हुआ था सफर

समस्तीपुर रेल कारखाने की स्थापना अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1881 में भाप इंजनों की ओवरहालिंग के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआती दौर में यहां रेल इंजनों की मरम्मत के साथ रेलवे के विभिन्न यांत्रिक कार्य किए जाते थे। 

समय के साथ रेलवे की तकनीक और जरूरतों में बदलाव आया और कारखाने की कार्यप्रणाली भी बदली। बाद के वर्षों में यहां माल डिब्बों के निर्माण और मरम्मत का काम प्रमुख हो गया। वर्तमान में यह पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत संचालित है।

मालगाड़ियों के वैगन का होता है निर्माण और मरम्मत

समस्तीपुर रेल कारखाना माल ढुलाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यहां स्टेनलेस स्टील से बने बीओएक्सएनएचल श्रेणी के माल डिब्बों का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा बीओएक्सएन श्रेणी के वैगनों की मरम्मत भी की जाती है। 

मरम्मत के दौरान वैगनों के खराब हिस्सों को ठीक करने, धातु की प्लेटों की कटिंग, वेल्डिंग, सफाई और फिटिंग जैसे कार्य किए जाते हैं। इन कार्यों से माल डिब्बों को दोबारा परिचालन योग्य बनाने में मदद मिलती है।

करीब 145 साल पुराने समस्तीपुर रेल कारखाने की सूरत बदलने की तैयारी

1881 में स्थापित रेल कारखाना का मुख्य ढांचा बेहद मजबूत रहा। इन वर्षों में एक बार भी इसकी मरम्मती नहीं हुयी। हाल के वर्षों में पुराना कारखाना होने के कारण इसके शेड, कार्यस्थलों के फर्श, दीवारों और छतों की स्थिति जर्जर हो चुकी थी, जिससे बारिश में सीलन और जलनिकासी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। 

पहली बार व्यापक स्तर पर जीर्णोद्धार हो रहा है। इसके लिए 2 करोड़ 42 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लंबे समय से रेलवे के माल डिब्बों के निर्माण और मरम्मत में अहम भूमिका निभाने वाले इस कारखाने की पुरानी संरचनाओं को दुरुस्त करने की पहल की गई है। जीर्णोद्धार का काम पूरा होने के बाद कारखाने के आधारभूत ढांचे में सुधार होने की उम्मीद है।

पुराने भवनों के कारण कामकाज में होती थी परेशानी

पुराना कारखाना होने के कारण यहां के भवनों और कार्यस्थलों की संरचनाएं जर्जर हो चुकी हैं। पुराने शेड की छतों, टूटे-उखड़े फर्श और दीवारों की स्थिति के कारण कर्मचारियों को काम करने में परेशानी होती है। 

वहीं, पुराने वॉशरूम, शौचालय और कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव में भी दिक्कत आती है। बारिश के दौरान जलनिकासी और भवनों में सीलन जैसी समस्याएं भी कार्यस्थल की स्थिति को प्रभावित करती हैं।

शेड से लेकर फर्श तक होगा जीर्णोद्धार

2 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत से होने वाले जीर्णोद्धार के तहत कारखाने के पुराने शेड, कार्यस्थलों के फर्श, दीवारों और छतों की मरम्मत की जाएगी। इसके साथ ही भवनों की जर्जर संरचनाओं को दुरुस्त करने, जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने और जरूरी बुनियादी सुविधाओं को व्यवस्थित करने का काम किया जाएगा। इससे कारखाने के पुराने परिसर को नया स्वरूप मिलेगा और कार्यस्थलों की स्थिति में सुधार होगा।

कर्मियों की कैंटीन और वाशरूम भी होंगे दुरुस्त 

कारखाने में कार्यरत कर्मचारियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कैंटीन, वाशरूम, शौचालय और पेयजल व्यवस्था से जुड़े हिस्सों का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके तहत जरूरत के अनुसार मरम्मत, साफ-सफाई और सुविधाओं को व्यवस्थित करने का काम होगा। इससे कर्मचारियों को बेहतर कार्यस्थल और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

120 वैगनों की पीओएच सुविधा की भी बनी है योजना

कारखाने के विकास की दृष्टि से वैगनों की पीओएच (पीरियोडिक ओवरहालिंग) सुविधा भी महत्वपूर्ण है। पीओएच के तहत निर्धारित अवधि पूरी होने पर वैगनों की व्यापक जांच और मरम्मत की जाती है। इसमें उनके विभिन्न कल-पुर्जों की जांच, मरम्मत और जरूरत के अनुसार बदलाव किया जाता है। 

पूर्व में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, समस्तीपुर कारखाने में 120 वैगनों तक की पीओएच क्षमता विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई थी। इस सुविधा के माध्यम से वैगनों की व्यापक मरम्मत का काम स्थानीय स्तर पर करने की दिशा में पहल की गई थी।

कारखाने के जीर्णोद्धार का कार्य 2.42 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। इससे पुराने भवनों और कार्यस्थलों की मरम्मत के साथ बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा। कार्य पूरा होने के बाद कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध हो सकेगा। - सुजीत कुमार, सहायक कारखाना प्रबंधक, रेल कारखाना, समस्तीपुर

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