समस्तीपुर। सरायरंजन प्रखंड मुख्यालय से डेढ़ किलोमीटर पश्चिम भागवतपुर बरईपुरा में स्थापित हैं भागवतेश्वर महादेव। स्थापना के ढ़ाई दशक में ही इस महादेव की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी है। यहां सच्चे मन से की गई उपासना हमेशा फलीभूत हुई है। यहां बिना किसी कठिनाई कें शिव के विष विरोधी कल्याणकारी व्यक्ति्व का दर्शन किया जा सकता है।

मंदिर का इतिहास

कहा जाता है कि ग्रामीण शिवभक्त भागवत भगत को सपने में अपनी जमीन में शिव मंदिर के स्थापना की प्रेरणा मिली। महादेव की प्रेरणा से सन 1990 में उन्होंने गांव के मध्य सोखा स्थान स्थित अपनी जमीन में शिव मंदिर की आधारशिला रखी। मंदिर का निर्माण जनसहयोग की अपेक्षा निजी खर्चों पर किया गया। मंदिर निर्माण के पश्चात उसका नामांकरण मंदिर के निर्माता भागवत भगत के नाम पर ही भागवतेश्वर महादेव के रूप में की गयी। यहां सालों भर धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। ग्रामीणों को भागवतेश्वर महादेव के प्रति अटूट आस्था है।

मंदिर निर्माण में मेरा भी सहयोग और समर्थन रहा है। बहुत सारे लोग इस मंदिर में आकर मन्नतें मांगते हैं। उनकी मन्नतें भी पूरी होती ह ं। बहुत सारे मरीज को शिव उपासना से भला चंगा होते देखा गया है।

डा. बलदेव भगत,

भावतपुर, बरैपुरा।

भागवतेश्वर महादेव की उपासना से प्रत्यक्ष लाभ मिलते देखा गया है। महादेव बड़े ही सरल स्वभाववाले, सर्वव्यापी, करूणामयी और भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होनेवाले देवता हैं। इनकी पूजा-उपासना में बहुत आडंबर क आवश्यकता नहीं होती। ये मूल रूप से आदिवासी, गुहावासी, वनवासी, निर्धन और वंचित लोगों के अराध्य देव हैं।

राजीव रंजन, सामाजिक कार्यकर्ता

श्रद्धा का महासावन

उदार चित्तवाले और सबका कल्याण करने वाले देवाधिदेव हैं महादेव। वे दीन-हीन और समाज के उपेक्षित लोगों के देवता हैं। ये शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर इन्हें श्रद्धा और भक्ति पूर्वक उपासना की जाए तो व्यक्ति का जीवन सुख, शांति और समृद्धि में बीतता है।

राजीव कुमार, पुरोहित

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