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पुराने आम के बागों को सुधारने के लिए सरकार दे रही सब्सिडी, समस्तीपुर में उद्यान विभाग ने जारी की गाइडलाइन

Published: Mon, 28 Sep 2026 05:04 PM (IST)

आम के बागों में बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के लिए कैनोपी प्रबंधन आवश्यक है, जिससे सूर्य का प्रकाश और हवा का संचार सुधरता है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. कैनोपी प्रबंधन से आम फलों की गुणवत्ता और आकार में सुधार।

  2. सूर्य प्रकाश, हवा से रोग नियंत्रण, कीट प्रबंधन आसान।

  3. पुराने पेड़ हटाने और नए लगाने पर सरकार अनुदान देती है।

जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। आम के बागों में बेहतर उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फल के लिए कैनोपी प्रबंधन यानी पेड़ की शाखाओं, पत्तियों और नई वृद्धि को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करना जरूरी है।

संतुलित और खुली कैनोपी से पेड़ के अंदर सूर्य का प्रकाश और हवा का बेहतर संचार होता है। इससे फलों के रंग, आकार और गुणवत्ता में सुधार के साथ कीट एवं रोग प्रबंधन भी आसान होता है।

जिला उद्यान पदाधिकारी तारिक असलम ने बताया कि घने और पुराने आम के बागों में शाखाएं एक-दूसरे के ऊपर आ जाने से पेड़ का अंदरूनी हिस्सा छायादार हो जाता है।

इससे नमी बनी रहती है और हवा का संचार कम होने के कारण रोगों की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में सूखी, मृत, रोगग्रस्त और कीटग्रस्त शाखाओं के अलावा आपस में रगड़ खाने वाली तथा अंदर की ओर बढ़ने वाली शाखाओं को हटाना उपयोगी है।

पानी की शाखाओं और अनावश्यक सीधी बढ़वार को भी नियंत्रित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पुराने पेड़ों में एक बार में भारी छंटाई करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कैनोपी प्रबंधन करना अधिक सुरक्षित होता है।

वहीं, युवा पौधों में शुरुआती वर्षों से ही ट्रेनिंग पर ध्यान देना चाहिए। सामान्यतः 60 से 80 सेंटीमीटर तक मजबूत मुख्य तना विकसित करने के बाद चारों दिशाओं में फैली मजबूत शाखाओं का चयन कर पेड़ का ढांचा तैयार किया जा सकता है।

मृत व पुराने पौधों को हटाने पर मिलेगा अनुदान

उद्यान निदेशालय की गाइडलाइन के अनुसार मृत, मर रहे अथवा पुराने पौधों को हटाने के लिए 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत यानी चार हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान का प्रावधान बताया गया है।

नए पौधों से खाली स्थान भरने के लिए भी 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत यानी चार हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान का प्रावधान है।

वहीं, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट प्रबंधन और सिंचाई के लिए 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत यानी 16 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान का प्रावधान बताया गया है।

सेंटर ओपनिंग से पेड़ के अंदर पहुंचेगी रोशनी

कैनोपी प्रबंधन में शाखाओं की छंटाई के साथ सेंटर ओपनिंग और पेड़ की ऊंचाई को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण है। इससे पेड़ के मध्य भाग तक सूर्य का प्रकाश पहुंचता है।

साथ ही दवा का छिड़काव, रोग-कीट की निगरानी और फल की तुड़ाई भी आसान होती है। फलदार पेड़ों में सामान्यतः फल तुड़ाई के बाद अनावश्यक शाखाओं की छंटाई की जा सकती है। फूल आने के ठीक पहले भारी प्रूनिंग से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे आगामी फलन प्रभावित हो सकता है।

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