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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 24, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महाकवि विद्यापति के बुलावे पर पहुंची थीं गंगा और शिव हुए विराजमान

By JagranEdited By:
Published: Tue, 24 Sep 2019 12:52 AM (IST)Updated: Tue, 24 Sep 2019 06:34 AM (IST)

गंगा नदी के उत्तर में अवस्थित मऊ-बाजिदपुर गांव आज मिथिलांचल ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश में आध्यात्म भक्ति साहित्य और ...और पढ़ें

महाकवि विद्यापति के बुलावे पर पहुंची थीं गंगा और शिव हुए विराजमान
महाकवि विद्यापति के बुलावे पर पहुंची थीं गंगा और शिव हुए विराजमान

समस्तीपुर । गंगा नदी के उत्तर में अवस्थित मऊ-बाजिदपुर गांव आज मिथिलांचल ही नहीं, बल्कि संपूर्ण देश में आध्यात्म, भक्ति, साहित्य और संस्कृति का संगम स्थल बना हुआ है। इतिहासकारों के मुताबिक अवध के नवाब बाजिद अली शाह के नाम पर स्थापित था यह गांव। वर्तमान में यह बालेश्वर स्थान विद्यापतिधाम के नाम से मशहूर है। इस स्थान पर मैथिली, संस्कृत, बंगला, अवधी व अवहट्ट भाषा के विद्वान कवि कोकिल विद्यापति ने समाधि ली थी। यहीं कवि कोकिल विद्यापति जी के आह्वान पर माता गंगा स्वयं यहां पर पहुंची तथा तथा उन्हें 'कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी ' को अपने अंक में समेटते हुए लौट गई थीं। किदवदंतियों के मुताबिक यहां स्वयं भगवान शिव महाकवि की भक्ति भावना से प्रसन्न होकर स्वस्फूर्त विराजमान हुए थे। समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय से 8 किलोमीटर दक्षिण तथा बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड से आठ किलोमीटर पश्चिम अवस्थित यह तीर्थ स्थल पक्की सड़कों व रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है।

सालों भर होते रहते हैं पूजा-पाठ व संस्कार

गंगा की सहायक वाया नदी के तट पर बसा यह स्थान आज लाखों शिव भक्तों की आस्था,श्रद्धा व विश्वास का केंद्र बन चुका है। यहां से मात्र चार किलोमीटर दक्षिणवर्ती इलाके में गंगा नदी है। जहां चौमथ (चमथा) घाट पर राजा जनक अपने पुष्पक विमान से नित्य स्नान करने आते थे। इसी स्थान से दो किलोमीटर दक्षिण-पूर्व इलाके मऊ गांव में संत रमता जोगी व बाबा गरीबनाथ की चिरसमाधि है। जहां दर्शन को प्रतिदिन सैंकड़ों श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती है। भक्त कवि विद्यापति की पुकार पर आने वाली माता गंगा के अवशेष चिह्न के रूप में रौंता धार भी महत्वपूर्ण स्थल है। वहीं किदवदंतियों से जुड़ी ब्रजमारा गाछी (जहां दस्युओं पर वज्रपात हुआ था) की रक्त युक्त मिट्टी आज भी विद्यमान है। इसके अलावा विवाह मंडप में विराजित दर्जनों भगवान की मूर्तियां पर्यटन के लिए आए लोगों को आकर्षित करती हैं। विद्यापतिधाम मंदिर में सालों भर पूजा-अर्चना, विवाह-संस्कार, उपनयन, मुंडन आदि चलता रहता है। इसके अति महत्वपूर्ण स्थल के रूप में इसकी प्रसिद्धि मनोकामना लिग के रूप में भी है। यहां भक्त-श्रद्धालु पुत्र रत्न की प्राप्ति हेतु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यहां मंदिर से सटा एक पर्यटक भवन भी है।

आकर्षित करता है प्रेम विहार मनरेगा पार्क

विद्यापतिनगर से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रेम विहार मनरेगा पार्क इलाके के लोगों के लिए काफी दर्शनीय स्थल है। प्रकृति प्रेमी सुकून के पल बिताने के लिए अवश्य यहां पहुंचते हैं। आधुनिकता की दौड़ में प्रखंड की सर्वोत्तम ग्राम पंचायत हरपुर बोचहा के प्रेम विहार पार्क के पिकनिक स्पॉट की लोकप्रियता ने सबको पीछे छोड़ दिया है। पर्यटकों के लिए स्वच्छता का संदेश लेकर प्रेम विहार पार्क हमेशा तैयार रहता हैं। पिकनिक स्पॉट के रूप में विख्यात यह पार्क आज जिले का सबसे नामचीन पिकनिक स्पॉट के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित किए हुए है। सालोंभर इस मनोरम स्थल पर आगंतुकों का खासतौर पर युवा प्रेमी युगल का आना-जाना लगा रहता है। विहंगम दृश्यों को अपने आगोश में समेटे इस पार्क में पिकनिक मनाने को लेकर हमेशा स्पॉट का चयन करने के लिए युवाओं की आवाजाही तेज हो जाती हैं। स्थानीय मुखिया प्रेम शंकर सिंह का कहना है कि यह पार्क स्वच्छता के संदेश के साथ खुले में शौच से मुक्त समाज के नवनिर्माण का नायाब उदाहरण बना हुआ है। पार्क में आधी आबादी के सम्मान में जगह-जगह स्वच्छ शौचालय का निर्माण कराया गया है। वहीं हजारों हरे- भरे फलदार व बेशकीमती पेड़ों को रंग- बिरंगे रंगों से सजाया गया हैं। प्रेम विहार पार्क में जल संचय के लिए बनाए गए तालाब व जल निकासी के लिए नहर - आहर जहां मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य की अविस्मरणीय छटा बिखेर रहे हैं, वहीं विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे फूल व औषधीय पेड़ों के बीच 'लैला-मजनू' का पौधा पार्क में आकर्षण का मुख्य केंद्र बना है।