समस्तीपुर। रोसड़ा अनुमंडलाधिकारी द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी से कारण पृच्छा जारी करते ही नप प्रशासन ने जल निकासी का प्रयास प्रारंभ कर दिया है। अनुमंडल कार्यालय एवं उपकारा के बीच पंप सेट लगाकर बड़े भूभाग में जमा वर्षा के पानी को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोग पंपसेट से जल निकासी को महज खानापूर्ति के साथ ही इसे ऊट के मुंह में जीरा ही करार दे रहे हैं। लेकिन सुबह से ही चल रहा नगर परिषद का पंप सेट जलजमाव के स्तर को कम करने में निश्चित रूप से सहायक होगा। इस बीच यदि बारिश का दौड़ जारी रहा तो स्थिति को बद से बदतर होना निश्चित है। लोगों की मानें तो जब तक जल निकासी की स्थाई व्यवस्था नहीं होती है तब तक जलजमाव की समस्या से मुक्ति मिलना मुश्किल है। प्रत्येक वर्ष यह समस्या उत्पन्न होने के बावजूद मानसून के समय में ही नगर प्रशासन की कुंभकरणी निद्रा भंग होना बताया। भाजपा कार्यकर्ता नवीन कुमार एवं प्रभात कुमार सिंह आदि ने कहा कि एक ओर जलजमाव की समस्या से निजात के लिए राजधानी में सरकार ही सड़क पर उतर चुकी है। विभागीय मंत्री सह उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद द्वारा लगातार इस ओर मीडिया के माध्यम से भी जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश दिया जा रहा है । और इसके बावजूद भी रोसड़ा शहर की जल निकासी व्यवस्था सु²ढ़ नहीं रहने पर पार्टी नेताओं ने खेद प्रकट किया है। साथ ही इस आशय की शिकायत विभागीय मंत्री से करने की भी चेतावनी दी है। बताते चलें कि अनुमंडल मुख्यालय स्थित अधिकांश सरकारी कार्यालय विगत वर्ष मानसूनी वर्षा के पानी से महीनों घिरा रहा था। दुर्गंधयुक्त पानी से महामारी की प्रबल संभावना थी। लोग बीमार भी हो रहे थे। शहर की जलनिकासी व्यवस्था चरमराई रहने के कारण करीब 4 महीने तक जलभराव की समस्या झेलनी पड़ी थी। सबसे बुरा हाल उपकारा का था जहां पानी में खड़े हो कक्षपालों को अपनी ड्यूटी निभानी पड़ती थी। इस अति गंभीर समस्या पर विगत वर्ष भी तत्कालीन एसडीओ द्वारा निर्देश जारी किया गया था। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी इस ओर नप प्रशासन का कदम नहीं बढ़ा। इसके कारण इस वर्ष भी मानसून की पहली बरसात में इन क्षेत्रों में जल जमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। मानसून से महज 15 दिन पूर्व ही मुख्य पार्षद एवं कार्यपालक पदाधिकारी के साथ साथ संबंधित नप कर्मियों की बैठक कर एसडीओ ने प्राथमिकता के आधार पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने को कहा था। इसके लिए कई योजनाएं भी तैयार की गई थी। जिसमें सभी नालों की उड़ाही, जगह-जगह ह्युम पाइप लगाना तथा संप हाउस बनाना आदि शामिल था। लेकिन नगर परिषद के उदासीनता का यह आलम है कि किसी भी योजना पर कार्य नहीं किया गया जिसके कारण जल निकासी की समस्या ज्यों की त्यों बरकरार रह गई। जिसे संज्ञान में लेते हुए एसडीओ ब्रजेश कुमार ने कार्यपालक पदाधिकारी पर कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण समर्पित करने को कहा था। संबंधित पत्र जारी होते हीं नगर परिषद द्वारा जल निकासी का प्रयास प्रारंभ कर दिया गया है।

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