समस्तीपुर। व्यक्ति के जीवन में पिता का बहुत बड़ा महत्व है। पिता से व्यक्ति का केवल जैविक रिश्ता ही नहीं बल्कि भावनात्मक और रागात्मक संबंध भी होता है। पिता चाहे जैसे भी हों, वे हमेशा अपने संततियों को हर प्रकार की सुविधाएं देने और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए तत्पर रहते हैं। पिता ही वह शख्स होते हैं जो संतति के उत्थान पर पर प्रफुल्लित होते है। संतति की ऊंचाई में अपनी ऊंचाई को देखते हैं। उक्त बातें श्वेतवर्णा प्रकाशन नई दिल्ली के वर्चुअल कार्यक्रम में मुकेश कुमार मृदुल ने कही। मौका था पिता को केंद्रित काव्य संकलन -'ओ!पिता' के लोकार्पण का। कविता कोष के उपनिदेशक राहुल शिवाय ने देशभर के कवियों द्वारा रचित चुनिदा कविताओं के इस संकलन के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पिता की संवेदनाओं को स्पर्श करने और पिता के

महत्त्व को समाज में स्थापित करने के लिए यह पुस्तक काफी उपयोगी है। उन्होंने कहा कि 'ओ!पिता' काव्य संकलन का संपादन चर्चित गीतकार ईश्वर करूण और युवा साहित्यकार मुकेश कुमार मृदुल ने संयुक्त रूप से किया है। इस पुस्तक का लोकार्पण मोहीउद्दीननगर उच्च विद्यालय के स्थापना के समय नियुक्त शिक्षक पंडित हृदय नारायण झा की 106 वीं जयंती के अवसर पर किया गया था। कार्यक्रम का प्रारंभ पंडित हृदय नारायण झा के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। ईश्वर करूण ने पिता के सम्मान में गीत प्रस्तुत करते हुए कहा - झिलमिल आंखो में तस्वीर तुम्हारी है, हरदम मुझको तुम पर है अभिमान पिता तेरी कृपा का ही तो सारा किस्सा है, मिलता है हर जगह मुझे सम्मान पिता। श्वेतवर्णा प्रकाशन की प्रबंध निदेशक शारदा सुमन ने पुस्तक का ऑनलाइन लोकापर्ण किया। इस कार्यक्रम में देशभर से दर्जनों दर्शक ऑनलाइन जुड़े हुए थे।

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