अब मानसून की राह नहीं ताकेंगे समस्तीपुर के किसान, मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना से 7150 हेक्टेयर में होगी सिंचाई
समस्तीपुर में मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत 1430 नलकूपों का निर्माण पूरा हो गया है, जिससे 7150 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई क्षमता विकसित हुई है।

निजी नलकूप योजना से 7150 हेक्टेयर में होगी सिंचाई (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना का लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल।
समस्तीपुर में 1430 नलकूपों का निर्माण कार्य पूरा हुआ।
7150 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई क्षमता विकसित हुई।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। जिले में खेती को मौसम की अनिश्चितता से बचाने की दिशा में मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हुई है। निजी नलकूपों के निर्माण से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने का वैकल्पिक साधन मिलेगा।
लघु जल संसाधन विभाग के समस्तीपुर लघु सिंचाई प्रमंडल ने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सभी 1430 नलकूपों का निर्माण पूरा करा लिया है। इससे जिले में 7150 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई क्षमता विकसित होने की बात कही गई है।
अब किसानों को खरीफ के साथ रबी और गरमा फसलों की खेती में भी सिंचाई के लिए बारिश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। समय पर पानी उपलब्ध होने से फसलों की बुआई और सिंचाई में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन किसानों को इसका लाभ मिल सकता है, जिन्हें बारिश में देरी या खेतों में नमी की कमी के कारण खेती के काम में परेशानी होती है।
हर नलकूप से पांच हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का लक्ष्य
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, समस्तीपुर लघु सिंचाई प्रमंडल को कुल 1430 निजी नलकूपों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। सभी नलकूपों का निर्माण पूरा होने के साथ ही लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल कर लिया गया है।
निर्धारित आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक नलकूप से औसतन पांच हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य जुड़ा है। इससे जिले में कृषि सिंचाई के वैकल्पिक संसाधनों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
लागत घटाने और बहुफसली खेती को मिलेगा बढ़ावा
निजी नलकूप की सुविधा मिलने से किसान जरूरत के अनुसार खेतों में पानी दे सकेंगे। इससे सिंचाई के लिए दूसरे संसाधनों पर निर्भरता कम करने और फसल चक्र को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
समय पर सिंचाई की सुविधा मिलने से किसान एक वर्ष में अलग-अलग मौसम की फसलें उगाने की योजना भी बना सकेंगे। हालांकि, वास्तविक लाभ नलकूपों के चालू रहने, भूजल की उपलब्धता और बिजली अथवा पंप संचालन की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
अनुदान के प्रविधानों के तहत मिलता है लाभ
मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार निजी नलकूप लगाने और पंप से संबंधित सहायता के लिए अनुदान का प्रविधान है। योजना का उद्देश्य कृषि भूमि तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाना और भूजल संसाधनों का उपयोग कर खेती को मजबूत करना है।
इसके लिए किसानों को निर्धारित पात्रता और दस्तावेज संबंधी शर्तें पूरी करनी होती हैं। नलकूप लगाने के लिए जमीन की उपलब्धता, भूमि संबंधी कागजात और प्रस्तावित स्थल की निर्धारित दूरी जैसे मानकों का पालन जरूरी है।
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