घर को ही बनाया गुरुकुल, समस्तीपुर की अंकिता ने सेल्फ स्टडी से हासिल की BPSC में सफलता
BPSC Success Story Samastipur: समस्तीपुर की अंकिता गोयल ने बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग कर ...और पढ़ें

अंकिता गोयल। फाइल फोटो, सौ: स्वजन।
संवाद सहयोगी, हसनपुर (समस्तीपुर)। BPSC Exam: कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और इरादे फौलादी हों, तो अभाव और बाधाएं कभी भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।
इसे सच कर दिखाया है समस्तीपुर जिले के हसनपुर बाजार की बेटी अंकिता गोयल ने। आर्थिक तंगी या सामाजिक बंधन का रोना रोए बिना अंकिता ने सेल्फ स्टडी को अपना संबल बनाया और 70वीं बीपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर ग्रामीण विकास अधिकारी के पद पर अपना चयन सुनिश्चित किया।
उन्होंने यह साबित कर दिया है कि इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों का सही इस्तेमाल किस तरह से किया जा सकता है।
अंकिता का बड़ा भाई आयुष एमबीए कर चुका है, जबकि छोटा भाई आदर्श गोयल पिता की छोटी दुकान में सहयोग कर रहा है।

घर को ही बनाया गुरुकुल
अंकिता की सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने किसी बड़े शहर या महंगे कोचिंग संस्थान का एक पल के लिए भी सहारा नहीं लिया।
पीसी स्कूल सकरपुरा से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 2022 में महिला कॉलेज पटना से स्नातक उत्तीर्ण कर उन्होंने अपने घर की चारदीवारी को ही अपना मुख्य गुरुकुल बना लिया। यहां रहकर उन्होंने प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक कठोर और नियमित पढ़ाई की।
इंटरनेट का किया बेहतर उपयोग
आज के डिजिटल इंडिया के दौर का उन्होंने सबसे बेहतरीन और सकारात्मक उदाहरण पेश किया है। अंकिता ने ऑनलाइन उपलब्ध अध्ययन सामग्री और इंटरनेट का उपयोग एक मजबूत मार्गदर्शन के रूप में किया।
कठिन और मुश्किल टॉपिक्स को उन्होंने खुद ऑनलाइन रिसर्च कर गहराई से समझा और अपने खुद के हस्तलिखित नोट्स तैयार किए, जिससे उनकी तैयारी को एक नई धार मिली।
बेटियों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
अंकिता की यह कामयाबी ग्रामीण क्षेत्र की उन तमाम बेटियों के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो आर्थिक तंगी या सामाजिक बंधनों के कारण बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग नहीं कर पाती हैं।
अंकिता ने यह दिखा दिया है कि यदि खुद पर अटूट भरोसा हो, तो बेहद सीमित संसाधनों में भी देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक को आसानी से पास किया जा सकता है।
कोई शॉर्टकट नहीं
सफलता के बाद अंकिता गोयल ने कहा कि इस मुकाम का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अगर पूरी ईमानदारी और अनुशासन के साथ सेल्फ स्टडी की जाए, तो हर लक्ष्य संभव है।
उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के अटूट विश्वास को दिया है। अब उनका मुख्य सपना ग्रामीण विकास अधिकारी के रूप में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की सेवा करना है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपनी बेटियों की प्रतिभा पर भरोसा करने की जोरदार अपील की।
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मां अंजू देवी और पिता शंकर अग्रवाल। फाइल फोटो, सौ: स्वजन।
माता-पिता का गर्व
बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर पिता शंकर अग्रवाल ने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का दिन और कोई नहीं हो सकता।
सपना ने बचपन से जो लगन दिखाई थी, आज उसका फल मिला है। वहीं, मां अंजू देवी ने कहा कि बेटी ने घर की जिम्मेदारियों को समझते हुए कभी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। माता-पिता ने समाज के हर अभिभावक से अपनी बेटियों को पढ़ाने और उन पर भरोसा करने की अपील की है।