समस्तीपुर । विधानसभा चुनाव को लेकर हर स्तर पर तैयारी चल रही है। सरकारी स्तर पर जहां चुनाव को लेकर कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है वहीं अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त की जा रही है। दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा भी अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर मंथन किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शमिल प्रमुख दल है। जिले में छह सीटों पर भाजपा की सहयोगी जदयू का कब्जा है। जबकि तीन सीटों पर राजद एवं एक सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। बुधवार को अचानक भारतीय जनता पार्टी ने समस्तीपुर, उजियारपुर, मोहिउद्दीननगर एवं रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र के मंडल अध्यक्ष, पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं जिला पदाधिकारी को पटना बुलाया। पटना के विभिन्न स्थानों पर इसको लेकर व्यवस्था की गई थी। वहां पर विधानसभा वार सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं को बुलाया गया। साथ ही सभी से अपने क्षेत्र के तीन उम्मीदवारों का नाम लिखकर एक बक्से में गिराने को कहा गया। फिर उसे लिफाफे में बंद कर सील किया गया। जिसे केन्द्रीय चुनाव समिति के समक्ष खोला जाएगा। जिले के दस में से चार विधानसभा सीटों के ही प्रमुख कार्यकर्ताओं को बुलाने से स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा इन्हीं चार सीटों पर अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी। बाकी छह सीटें अपने सहयोगी दलों के लिए छोड़ेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि जदयू की जो सीटिग सीटें हैं, वहां के भाजपा कार्यकर्ताओं को नहीं बुलाया गया था। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा इन्हीं चार सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी।

उम्मीदवारों को भी नहीं लगने दी गई भनक

सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा प्रदेश कार्यालय से मंगलवार की रात करीब आठ से नौ बजे में सभी मंडल अध्यक्ष एवं पूर्व मंडल अध्यक्षों को फोन किया गया। उन्हें सुबह नौ बजे पटना हर हाल में पहुंचने के लिए कहा गया। किसी को भी यह नहीं बताया गया कि क्यों बुलाया जा रहा है। यहां तक की विभिन्न विधानसभा क्षेत्र से ताल ठोंकने की तैयारी कर रहे भाजपा नेताओं को भी इसकी भनक नहीं लगने दी गई। भाजपा सूत्रों का कहना है कि पहले से यदि सूचना देकर बुलाया जाता तो संभव है कि संभावित उम्मीदवार अपने पक्ष में प्रस्ताव देने के लिए उन पर दबाव बनाते। पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एक साथ पूरे बिहार के वैसे सभी सीटों के प्रमुख कार्यकर्ताओं को बुलाकर पार्टी उम्मीदवारों के बारे में राय ले ली गई। जिस प्रत्याशी को यह भनक लग भी गई तो उन्हें उस स्थल पर अंदर जाने नहीं दिया गया जहां मंडल अध्यक्षों को बुलाया गया था। फिर अपेक्षित कार्यकर्ताओं ने ही उसमें भाग लिया। सभी को एक कागज दिया गया और अपने क्षेत्र के क्रमवार तीन उम्मीदवारों के नाम लिखकर देने को कहा गया था।

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