विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार में जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने के लिए ₹14.05 करोड़ मंजूर, 1200 गांवों को मिलेगा लाभ

Published: Sun, 18 Oct 2026 04:43 PM (IST)

बिहार में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से खेती को बचाने के लिए ₹14.05 करोड़ की लागत से 24 जिलों के 1200 गांवों में एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. ₹14.05 करोड़ से 24 जिलों में जलवायु अनुकूल खेती।

  2. 1200 गांवों में किसानों को आधुनिक कृषि प्रशिक्षण।

  3. कृषि उत्पादकता बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने का लक्ष्य।

प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने के लिए 14.05 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि से राज्य के 24 जिलों के 1200 गांवों (120 प्राथमिक, 1080 द्वितीयक) में कार्यक्रम चलेगा।

हर जिले में बीज गुणन प्रक्षेत्र के पांच गांवों को जलवायु अनुकूल बनाया जाएगा। रबी सीजन में 750 एकड़ और गरमा में 400 एकड़ में प्रत्यक्षण होगा।

प्राथमिक गांवों के आसपास के नौ-नौ गांवों को द्वितीयक गांव के रूप में चयनित किया जाएगा। यहां के किसानों को प्राथमिक गांवों में बुलाकर आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कृषि विभाग की अपर सचिव कल्पना कुमारी ने पत्र जारी किया है। मोटे अनाज, तिलहन, दलहन, मसाला और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा मिलेगा।

हर जिले में 30 एकड़ का सीड हब, मृदा जांच, लीफ कलर चार्ट, कस्टम हायरिंग सेंटर, बी-बाक्स और वर्मी कंपोस्ट इकाई जैसी गतिविधियां होंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य बदलती जलवायु के कारण फसल उत्पादन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और खेती को टिकाऊ बनाना है।

इसके तहत किसानों को बाढ़, सूखा, अल्पवृष्टि और तापमान में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

साथ ही संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से खेती को सुरक्षित रखने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम को गति दी गई है।

इन जिलों में होगा कार्यक्रम का संचालन

योजना के लिए चयनित जिलों में समस्तीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, सारण, अररिया, अरवल, भागलपुर, भोजपुर, जहानाबाद, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, रोहतास, सहरसा, सुपौल, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार और वैशाली शामिल हैं।

डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसान होंगे लाभार्थी

योजना के तहत किसानों का चयन कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसानों में से किया जाएगा। निर्धारित प्रविधान के अनुसार, चयनित किसानों के पास न्यूनतम 0.5 एकड़ और अधिकतम तीन एकड़ तक जोत होनी चाहिए।

कार्यक्रम का नोडल कार्यालय कृषि विभाग पटना रहेगा। इससे चयनित गांवों में कृषि तकनीकों के प्रसार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रति खेती की क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें- बिहार में 4 माह बाद खुला वीटीआर, जंगल सफारी से राफ्टिंग तक रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद

जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना है। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा, अल्पवृष्टि और तापमान में उतार-चढ़ाव का फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य सुधार के प्रति जागरूक किया जाएगा।

-

डॉ. सुमित सौरभ, जिला कृषि पदाधिकारी, समस्तीपुर।