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बिहार के 24 जिलों के 1200 गांव बनाए जाएंगे जलवायु अनुकूल, किसानों को मिलेगा लाभ

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:30 AM (IST)

बिहार के 24 जिलों के 1200 गांवों में जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए 14.05 करोड़ रुपये खर्च ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. 14.05 करोड़ रुपये से 24 जिलों में कार्यक्रम।

  2. 1200 गांवों में किसानों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण।

  3. बाढ़, सूखा से निपटने को मिलेगी मदद।

प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने के लिए 14.05 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि से राज्य के 24 जिलों के 1200 गांवों (120 प्राथमिक, 1080 द्वितीयक) में कार्यक्रम चलेगा। हर जिले में बीज गुणन प्रक्षेत्र के पांच गांवों को जलवायु अनुकूल बनाया जाएगा।

इन प्राथमिक पांच गांवों के आसपास के नौ-नौ गांवों को द्वितीयक गांव के रूप में चयनित किया जाएगा। यहां के किसानों को प्राथमिक गांवों में बुलाकर आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस तरह एक जिले में प्राथमिक व द्वितीयक मिलाकर 50 गांव जलवायु अनुकूल खेती से जुड़ेंगे। रबी सीजन में 750 एकड़ और गरमा में 400 एकड़ में प्रत्यक्षण होगा। कृषि विभाग की अपर सचिव कल्पना कुमारी ने इस संबंध में संबंधित जिलों को पत्र भेजा है।

जलवायु अनुकूल खेती में मोटे अनाज, तिलहन, दलहन, मसाला और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा मिलेगा। हर जिले में 30 एकड़ का सीड हब, मृदा जांच, लीफ कलर चार्ट, कस्टम हायरिंग सेंटर, बी-बाक्स और वर्मी कंपोस्ट इकाई जैसी गतिविधियां होंगी।

कार्यक्रम का उद्देश्य बदलती जलवायु के कारण फसल उत्पादन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और खेती को टिकाऊ बनाना है।

इसके तहत किसानों को बाढ़, सूखा, अल्पवृष्टि और तापमान में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इन जिलों में होगा कार्यक्रम का संचालन

चयनित जिलों में समस्तीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, सारण, अररिया, अरवल, भागलपुर, भोजपुर, जहानाबाद, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, रोहतास, सहरसा, सुपौल, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार और वैशाली शामिल हैं।

पंजीकृत किसान होंगे लाभार्थी 

योजना के तहत किसानों का चयन कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसानों में से किया जाएगा। निर्धारित प्रविधान के अनुसार, चयनित किसानों के पास न्यूनतम 0.5 एकड़ और अधिकतम तीन एकड़ तक जोत होनी चाहिए।

कार्यक्रम का नोडल कार्यालय कृषि विभाग पटना रहेगा। इससे चयनित गांवों में कृषि तकनीकों के प्रसार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रति खेती की क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना है। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा, अल्पवृष्टि और तापमान में उतार-चढ़ाव का फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य सुधार के प्रति जागरूक किया जाएगा।
-डा. सुमित सौरभ, जिला कृषि पदाधिकारी

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