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सहरसा में बोले प्रशांत किशोर, जंतर-मंतर से उठी आवाज देशभर में गूंजेगी, अगले 1-2 साल में विकराल रूप लेगा आंदोलन

Published: Fri, 16 Oct 2026 12:57 PM (IST)

प्रशांत किशोर ने कहा कि जंतर-मंतर पर शिक्षा, पेपरलीक और बेरोजगारी को लेकर चल रहा आंदोलन बड़ा रूप लेगा।

सहरसा में बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर।

सहरसा में बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर।

HighLights

  1. जंतर-मंतर आंदोलन बड़ा रूप लेगा, बोले प्रशांत किशोर।

  2. चुनाव आयोग की कार्यशैली पर प्रशांत किशोर ने उठाए सवाल।

  3. अगले 1-2 साल में जेपी आंदोलन जैसा जन-विप्लव संभव।

संवाद सहयोगी, सहरसा। जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा है कि पिछले दो महीनों से जंतर-मंतर पर शिक्षा में सुधार, पेपरलीक और बेरोजगारी को लेकर जो आंदोलन चल रहा है, यदि किसी को यह गलतफहमी है कि यह प्रदर्शन समय के साथ स्वतः समाप्त हो जाएगा।

या इसे मैनेज कर लिया जाएगा, तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल है। गुरुवार को सहरसा में स्नातक विधान पार्षद (MLC) चुनाव के सिलसिले में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही।

प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि आज समाज के एक बहुत बड़े हिस्से में शिक्षा और रोजगार के अवसरों को लेकर भारी असंतोष सुलग रहा है, जो किसी न किसी रूप में बड़े आंदोलन का रूप अवश्य लेगा।

चुनाव आयोग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह मामला केवल 'एसआईआर' (SIR) तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले आठ-दस वर्षों से चुनाव आयोग की पूरी कार्यशैली ही गंभीर संदेह के घेरे में आ चुकी है।

PK Jantar Mantar Protests to Spark Major Movement in 1-2 Years (1)

चाहे नया वोटर बनाने का मामला हो, वोटरों के नाम काटने के लिए एसआईआर का दुरुपयोग हो, चुनाव की तिथियां तय करने का समय हो या मतगणना के दौरान एकतरफा कार्रवाई, हर मामले में आयोग सत्ताधारी दल और भाजपा के पक्ष में काम करता नजर आता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले एमएलसी चुनाव आमतौर पर रविवार के दिन कराए जाते थे, लेकिन इस बार इन्हें शुक्रवार के दिन आयोजित किया जा रहा है, जिसके पीछे स्पष्ट मंशा यह है कि मुस्लिम मतदाता कम संख्या में मतदान में शिरकत कर सकें। इसके अलावा, चुनाव प्रचार के लिए भी बेहद कम समय दिया गया ताकि विरोधियों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका न मिल सके।

लोकतंत्र और वोट की ताकत पर प्रहार का आरोप

जनसुराज नेता ने कहा कि बिहार में एसआईआर के नाम पर लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान से ठीक दो दिन पहले बड़े पैमाने पर पैसे बांटकर वोट खरीदे गए और चुनाव आयोग पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा। जब लोकतंत्र में जनता की एकमात्र ताकत यानी उनके वोट के अधिकार के साथ ही गड़बड़ी होने लगे, तो जनता का असंतोष सड़कों पर उभरकर सामने आना स्वाभाविक है।

जेपी आंदोलन की तर्ज पर बड़े जन-विप्लव की चेतावनी

आगामी राजनीतिक भविष्य की चेतावनी देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि कोई भी बड़ा आंदोलन समाज में सुधार के लिए ही जन्म लेता है। जिस प्रकार गुजरात में मेस की फीस को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन एक समय दबा दिया गया था।

लेकिन बाद में लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में इंदिरा गांधी के खिलाफ पूरे देश में एक अभूतपूर्व और मजबूत आंदोलन खड़ा हो गया था, ठीक वही इतिहास आने वाले एक-दो वर्षों में देश में दोहराया जाने वाला है।

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