सहरसा। गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का सहरसा जिले में बुरा हाल है। जिला टास्क फोर्स कमेटी द्वारा बेरोजगारों के आवेदन की स्वीकृति के बाद बैंकों की मनमानी के कारण बेरोजगार युवाओं को ऋण प्राप्त करने में सफलता नहीं मिल रही है। बैंकों की मनमानी चरम पर है। अधिकांश उन्हीं बेरोजगारों को ऋण मिल पा रहा है, जिसे पूर्व से ही कोई-न-कोई व्यवसाय है। आम शिक्षित बेरोजगारों को इस योजना का लाभ लेने में जूते तो घिस रहे हैं। परंतु सफलता नहीं मिलती। बैंकों की लापरवाही के कारण ही जिला साख समिति द्वारा तय लक्ष्य को पूरा कराने में जिला प्रशासन और उद्योग विभाग को नाको चना चबाना पड़ता है। इसके बावजूद उसके वित्तीय वर्ष समाप्ति के बाद दर्जनों आवेदन लौट जाता है। चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज एक महीना शेष रह गया है। परंतु 25 फीसद से भी कम उपलब्धि प्राप्त हो सकी है। ऐसे में लक्ष्य को पूरा करना कठिन प्रतीत हो रहा है।

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25 लाख तक ऋण देने का है प्रावधान

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बेरोजगार युवक-युवतियों को पांच लाख से पच्चीस लाख तक ऋण देने का प्रावधान है। आठवीं उत्तीर्ण को महज दस लाख तक और मैट्रिक पास के लिए 25 लाख तक ऋण दिए जाने की योजना है। इस योजना में शहरी क्षेत्र में सामान्य जाति के लिए 15 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र के लाभुकों को 25 फीसद अनुदान दिया जाता है। इसी प्रकार शहरी क्षेत्र की सामान्य महिला,अनुसूचित जाति-जनजाति व पिछड़ा वर्ग के आवेदकों के लिए 25 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 35 फीसद अनुदान का प्रावधान है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि बैंकों की मनमानी के कारण आम बेरोजगारों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। जिला टास्क फोर्स कमेटी पूरी प्रक्रिया के बाद आवेदन तो स्वीकृत करता है, परंतु बिना पहुंच व पैरवी वाले स्वीकृत आवेदन बैंक बिना किसी ठोस और पर्याप्त कारण के वापस कर देता है। जिससे हारकर कई लोगों ने ऋण लेने का प्रयास ही छोड़ दिया।

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117 की जगह महज 33 के आवेदन की मिली स्वीकृति

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चालू वित्तीय वर्ष में जिला परामर्शदात्री समिति ने 117 लाभुकों को ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसके अनुरूप उद्योग महाप्रबंधक कार्यालय के माध्यम से 47, खादी बोर्ड का 35 और खादी आयोग के माध्यम से 35 आवेदकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके लिए कुल चार करोड़ 12 लाख मार्जिन मनी निर्धारित है। इन योजनाओं के लिए अबतक कुल 280 आवेदकों ने ऋण के लिए आवेदन दिया, जिसमें मात्र 33 की स्वीकृति मिली। इन सभी आवेदकों को भी ऋण की राशि अबतक नहीं मिल सकी है। लाभुक डीआरसीसी और बैंकों की दौड़ लगा रहे हैं।

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कुछ बैंकों द्वारा पीएमईजीपी योजना में ऋण देने में उदासीनता बरती जा रही है। इसकी समय-समय पर समीक्षा हो रही है। बैंकों के वरीय अधिकारियों को लिखा भी जाता है। चालू वित्तीय वर्ष में इसके लिए प्रशासन पहले से ही सचेत हैं। बेरोजगारों को तंग-तबाह किए जाने की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

प्रकाश चौधरी, महाप्रबंधक, डीआरसीसी, सहरसा

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