सहरसा। जिले में तीज पर्व विधि विधान के साथ मनाया गया। विवाहित महिलाओं ने अखंड सौभाग्यवती के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रखकर पूजा-अर्चना की। तीज पर्व में महिलाएं माता गौरी एवं भगवान शिव की आराधना करते हैं। मान्यता है कि तीज पर्व करने वालों को भगवान अखंड सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त होता है। मान्यता है कि तीज पर्व बहुत ही कठिन है। तीज पर्व के दौरान महिलाएं अन्न, जल का ग्रहण नहीं करती है। महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत रखती हैं। अपने मनोवांछित वर पाने एवं पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती है। दिन से ही पूजन कार्य आरंभ होता है और रात तक चलता है। बुधवार को शुरू हुए तीज पर्व का समापन दूसरे दिन गुरूवार को सूर्योदय के बाद माता पार्वती को ¨सदूर चढ़ाने के बाद ही किया जाता है। तीज पर्व करने के बाद महिलाएं अपने-अपने पतियों को प्रणाम करने के बाद उसके हाथों से प्रसाद का निवाला ग्रहण कर अन्न खाती है।

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मेहंदी लगाने की है परंपरा तीज पर्व को लेकर मेंहदी लगाने की परम्परा कायम है। वहीं तीज पर्व को लेकर महिलाएं एक-दो दिन पहले से ही मेहदी लगाना नहीं भूलती है। मेहंदी लगाने के लिए महिलाएं पार्लर का भी सहारा लेती है। मेंहदी लगाने वाली कई महिलाओं को इससे रोजगार भी मिला है। इन दिनों मेहंदी लगाने वालों की चांदी रहती है। महिलाओं को दोनों हाथ में मेहंदी लगाने के लिए 200 से 1000 रूपये तक खर्च करने पड़ते है। अनंदिता राय कहती है कि इस बार मेहंदी लगाने वालों की दिन भर कतार लगी रही।

Posted By: Jagran