सहरसा। शहर के हटियागाछी निवासी नूतन सिंह छात्र जीवन से जरूरतमंदों की सेवा करती रही है। बचपन से मेधावी छात्रा रही नूतन सिंह जीविका से वर्ष 2006 से ही जुड़कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ रही है। वो अब तक दो सौ से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना चुकी है। बचपन से ही नूतन सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती थी। कॉलेज लाइफ में एनसीसी कैडेटस के रूप में अपनी पहचान कायम की। वर्ष 1991 में मैट्रिक करने के बाद कॉलेज में नामांकन लेने के पश्चात वे एनसीसी से जुड़ी। उस समय लड़कियां इन क्षेत्रों में गिनती की ही दिखती थी। करीब तीस वर्ष पूर्व ही वह एनसीसी में जुड़ी और अपनी काबलियत के बल पर दिल्ली में रिपब्लिक डे में हिस्सा लेकर गोल्ड मेडल जीती। एनसीसी के क्षेत्र में वह भारत के विभिन्न हिस्सों में आयोजित ट्रेनिग कैंप और टूर में हिस्सा लेती थी। छात्र संगठन विद्यार्थी परिषद से जुड़ी और कॉलेज में छात्राओं के हक अधिकार की लड़ाई लड़ती रही। नेतृत्व क्षमता के बदौलत वे छात्र संगठन में प्रदेश स्तर पर कई जिम्मेवारियों का निर्वहन किया। नूतन कहती है कि तीन दशक पूर्व पहले घर से बेटियां को निकलने नहीं दिया जाता था, लेकिन अपने संघर्ष के बल पर नूतन को हर जगह सफलता मिलती चली गई और प्रतिभा से आगे निरंतर बढ़ती गई। लड़कियों के लिए नूतन प्रेरणास्त्रोत बनी रही कि अगर मन में लगन व ²ढ़ निश्चय हो तो कोई काम मुश्किल नहीं है।

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अभिनय के क्षेत्र में थी रूचि

नूतन सिंह को अभिनय में भी रूचि थी। शहर के नाट्य संस्था आह्वान, पंचकोसी से जुड़कर कई नाटकों में अभिनय किया। रमेश झा महिला महाविद्यालय में कटे हाथ नाटक की प्रस्तुति में उन्हें काफी प्रशंसा मिली। हिदी सीरियल में श्याम भाष्कर के निर्देशन में काम करने का भी अवसर मिला।

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यूनिसेफ से जुड़कर की काम

वर्ष 2006 में यूनिसेफ से जुड़कर शहरी क्षेत्र में बीएमसी ब्लॉक कोर्डिनेटर के रूप में वर्ष 2010 तक काम किया। इसके बाद सहरसा जिले में वर्ष 2010 से 2012 तक महिला विकास निगम में वूमेन्स प्रोटेक्शन ऑफिसर के रूप में काम किया। इसके बाद वर्ष 2013 में महिला समृद्धि योजना में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में सहरसा, सुपौल एवं मधेपुरा तीनों जिलों में काम किया।

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महिलाओं को दी आर्थिक स्वतंत्रता

जीविका में जुड़ने के बाद नूतन सिंह ने जिले के सत्तरकटैया प्रखंड की सैकड़ों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ दिया। स्वरोजगार से जुड़ते ही महिलाओं ने अपनी आर्थिक आमदनी बढ़ानी शुरू कर दी है। एक महिलाएं से दूसरी, तीसरी जुड़ती चली गयी और यह अब एक कारवां का रूप ले लिया है। वे कहती है कि अब तक दर्जनों महिलाओं को मखाना उद्योग, चूड़ा मिल, किराना दुकान, सब्जी उत्पादन, मसाला पिसाई, बड़ी, आचार व पापड़ बनाने की घर-घर कला सिखा दी। इसके बाद हर महिलाओं को इसके उत्पादन से जोड़ दिया। घर बैठे ही महिलाएं कमाना शुरू कर दिया।

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जीविका दीदीयों ने सबसे ज्यादा बनाया मास्क

नूतन कहती है कि जिले के सत्तरकटैया प्रखंड में सबसे ज्यादा मास्क का निर्माण किया गया। पूरे जिले में जीविका दीदियों ने सबसे ज्यादा मास्क सत्तर में बनाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मार्च 2020 से ही मास्क का निर्माण किया जा रहा है। मास्क बनाकर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया गया।

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सदर अस्पताल में चल रहा दीदी की रसोई

नूतन कहती है कि काफी अथक प्रयास के बाद सदर अस्पताल में जीविका की दीदीयों द्वारा संकल्प दीदी की रसोई 14 सितंबर 20 से संचालित की जा रही है जिसमें सत्तरकटैया प्रखंड की ही जीविका दीदी कार्य कर रही है।

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