सहरसा में सिंचाई व्यवस्था की भी खुली पोल: खरीफ सीजन बीता पर नहरों में नहीं आया पानी, रबी फसल पर भी संकट
सहरसा में खरीफ की खेती के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे किसान महंगे पंपसेट से सिंचाई करने ...और पढ़ें

नहरों में नहीं आया पानी
HighLights
खरीफ फसल के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया।
किसान महंगे पंपसेट से सिंचाई करने को मजबूर हुए।
रबी की खेती को लेकर भी किसान चिंतित और परेशान।
संवाद सहयोगी, सहरसा। खरीफ की खेती के लिए काेसी क्षेत्र के किसान पटवन सुविधा के अभाव में परेशान हैं। दूसरी ओर 15 जून से पानी छोड़ने के बजाय अब जब धान की फसल पकने के लिए तैयार है, तब भी नहर में पानी नहीं आया। नहरों की मरम्मत के नाम पर आज- कल होता और खरीफ का मौसम लगभग बीत गया।
रबी की खेती के समय नहर में पानी आ पाएगा अथवा नहीं इसका कोई ठोस जबाव देनेवाला नहीं है। किसान पानी का इंतजार करते रह गए और सुखाड़ के समय को छोड़कर विभाग द्वारा अव्यवहारिक तरीके से मूल खेती के समय नहर को पानी से वंचित रखा। इससे इलाके के किसान परेशान रहे, अब उन्हें रबी की खेती को लेकर भी यह भय सता रहा है।
कोसी मेंची योजना के बहाने नहरों में नहीं छोड़ा गया पानी
सहरसा जिले में सहरसा व सुपौल उपशाखा को मिलाकर कुल 90 किलोमीटर लंबी नहर है। इस नहर में अगर सुपौल जिले से सहरसा जिले की नहर में पानी पहुंच भी जाती है तो सहरसा जिले की जर्जर नहर में जहां- तहां पानी अवरूद्ध जाता है। कहीं नहर टूटने से खेतों में लगी फसल बर्बाद हो जाती है तो कहीं खेत पानी के लिए तरसता है।
सौरबाजार , पतरघट प्रखंड के कई भाग में नहर से पानी पहुंचती ही नहीं है। विभाग द्वारा खरीफ की खेती के लिए हर हाल में अंतिम रूप से 15 जून तक पानी छोड़ने का आदेश है, परंतु इस वर्ष अबतक कोसी मेंची योजना के नाम पर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, जबकि इस योजना के संचालित होने के बाद भी सहरसा, सुपौल व मधेपुरा जिले में नहरों में पानी छोड़े जाने में कोई परेशानी नहीं है।
बावजूद इसके अधिकारियों की लापरवाही व मनमानी के कारण अबतक नहरों में पानी नहीं आया। और किसान पंपसेट से महंगी सिंचाई करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में किसान रबी की खेती को लेकर भी चिंतित हैं।
कोसी मेंची के कार्य के कारण नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया। रबी में किसानों को परेशानी नहीं हो इसके लिए प्रयास जारी है। - अफजल आलम, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, सहरसा।
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