यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 02, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सहरसा की धरती बता रही अपना इतिहास
अमरेंद्र कांत, सहरसा: सहरसा की धरती इनदिनों अपना इतिहास बता रही है। 1956 से लेकर अबतक जिले में निरंत

अमरेंद्र कांत, सहरसा: सहरसा की धरती इनदिनों अपना इतिहास बता रही है। 1956 से लेकर अबतक जिले में निरंतर खोदाई के दौरान पौराणिक मूर्तियां, सिक्का व अवशेष आदि मिल रहे हैं। हाल के दिनों में मटेश्वर धाम में खोदाई के समय सूर्य व सरस्वती की तीन प्रतिमाएं मिली थीं। ये पौराणिक काल की बताई जा रही हैं। नाकुच स्थित टीले की खोदाई में कई पौराणिक मूर्तियां, दानपत्र, पाषाण कालीन सिक्के आदि मिल चुके हैं। पुरातत्व की टीम के सर्वे में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है। बावजूद इलाके का नये सिरे से सर्वे नहीं किया जा रहा है। जबकि सर्वे होने से धरती के नीचे से कई और विरासतें सामने आ सकती हैं।
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1956 में मिले थे सिक्के
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वर्ष 1956 में खोदाई के दौरान गोरहोघाट में सिक्का मिला था। उस समय पुरातत्वविद आरके चौधरी के निर्देशन में टीम पहुंची थी। टीम ने बताया कि सिक्का दूसरी शताब्दी के आसपास का है। कुछ वर्ष पहले महिषी स्थित मंडन धाम की खोदाई के दौरान कुंआ मिला था। पुरातत्व विभाग की टीम डा. शंकर शर्मा के निर्देशन में सर्वे किया गया था। जिसमें कुंआ को सातवीं शताब्दी का बताया गया था। महिषी प्रखंड के नाकुच में कई पौराणिक वस्तु मिलने के बाद यहां टीम ने सर्वे की थी।
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मटेश्वर धाम में मिली पौराणिक मूर्तियां
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कुछ माह पहले मटेश्वर धाम मंदिर में खोदाई के दौरान मां सरस्वती की पौराणिक मूर्तियां मिली थी। जिसे मंदिर में ही स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है। महिषी तारा स्थान में भी पोखर खोदाई के दौरान कई पौराणिक मूर्तियां मिलने के बाद पुरातत्व विभाग की टीम ने सर्वे किया था। जिसमें मूर्तियों के पौराणिक काल की होने की पुष्टि की थी। यहीं नहीं यहां बौद्धकालीन चिह्न भी कई बार मिल चुके हैं।
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कई बार टीम कर चुकी है सर्वे
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पुरातत्व विभाग की टीम पुरातत्वविद फणिकांत मिश्र, आरके चौधरी, प्रकाश चंद्र, डा. शंकर शर्मा आदि के निर्देशन में कई बार तारा स्थान, मंडन धाम, नाकुच समेत अन्य जगहों का सर्वे कर रिपोर्ट दे चुकी है। बावजूद इस इलाके में अबतक पुरातात्विक महत्व को उकेरने के लिए प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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इलाके के प्रमुख स्थल
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चौंसठ योगिनी रक्तकाली मंदिर, सहरसा
तारा स्थान व मंडन भारती धाम, महिषी
सूर्य मंदिर : कंदाहा, यहां द्वापर कालीन भगवान सूर्य की मूर्तियां है।
कारू खिरहरि स्थान,
संत लक्ष्मीनाथ गोंसाई स्थान, बनगांव
बाबा मटेश्वर धाम, काठो
नीलकंठ महादेव, चैनपुर
चंडी स्थान, विराटपुर
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मटेश्वर धाम में पौराणिक मूर्तियों के मिलने के बाद पुरातत्व विभाग की टीम को सर्वे का निर्देश दिया गया है। यही नहीं कई धार्मिक व पौराणिक स्थलों का भी सर्वे करने को कहा गया है। सर्वे के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डा. आलोक रंजन, मंत्री, कला संस्कृति विभाग, बिहार।