रोहतास। अनुमंडल क्षेत्र के कैमूर पहाड़ी पर बसे नौहट्टा व रोहतास प्रखंड के 11 राजस्व गांव के 85 टोला में बसे 25 हजार आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराए जाने को लेकर रेहल, शोली, नागा टोली, धंसा, तारडीह स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित हैं। कितु भौगोलिक बनावट के कारण किसी भी स्वास्थ्य उपकेंद्र पर स्वास्थ्य कर्मियों के नहीं रहने से ग्रामीणों को चिकित्सीय सेवा में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जबकि इन गांव के लोग चिकित्सा व्यवस्था में इन्हीं स्वास्थ्य उप केंद्रों एवं ग्रामीण चिकित्सकों पर आश्रित हैं। जिसे लेकर हर वर्ष मलेरिया डायरिया समेत कई बीमारियों से यहां के लोग जूझते हुए काल कवलित हो जाते है।

एक सप्ताह से पेट दर्द और बुखार से पीड़ित चुन्हटा गांव के चार लोगों की मौत हो गई है। जिसकी सूचना पर सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार के नेतृत्व में चिकित्सकों का दल पहाड़ी पर बसे गांवों का दौरा किया। स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति को देखते हुए सीएस ने कहा कि हर हाल में कैमूर पहाड़ी पर बसे स्वास्थ्य उप केंद्र सु²ढ़ होंगे। ड्यूटी से गायब रहने वाले कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पूर्व मुखिया कृष्णा सिंह यादव कहते है कि इन स्वास्थ्य उप केंद्रों पर न ही दवा उपलब्ध है न ही स्वास्थ्य कर्मी। सभी स्वास्थ्य उप केंद्र पर ताला लटके रहते हैं। जब टीकाकरण कार्यक्रम शुक्रवार को होता है तब स्वास्थ्य कर्मी एक दिनों के लिए जाते हैं। टीकाकरण अभियान चला कर चले आते हैं। और यहां के लोग ग्रामीण चिकित्सकों पर इलाज के लिए आश्रित रहते हैं।बताते चलें कि बुधवा गांव में पांच वर्ष पूर्व मलेरिया से पांच लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2017 में जेमरदाग में दो व बजमरवा गांव में भी दो लोगों की मौत मलेरिया से हुई थी। दो वर्ष से डीडीटी का छिड़काव भी नहीं हो पा रहा है। इन गांव में अभी जहां जहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है, वहां मलेरिया और डायरिया का प्रकोप होते रहता है।

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