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दो बार BPSC इंटरव्यू में मिली नाकामी, तीसरी कोशिश में बनीं SDO; आर्थिक तंगी से लड़कर सुधा सिंह ने हासिल की 167वीं रैंक

Published: Thu, 05 Nov 2026 03:10 PM (IST)

रोहतास की सुधा सिंह ने दो बार बीपीएससी इंटरव्यू में असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और 70वीं ...और पढ़ें

दो बार इंटरव्यू में मिली निराशा, तीसरी कोशिश में मिली मंजिल

दो बार इंटरव्यू में मिली निराशा, तीसरी कोशिश में मिली मंजिल

HighLights

  1. दो बार असफल होने पर भी सुधा ने नहीं मानी हार।

  2. 70वीं बीपीएससी में 167वीं रैंक पाकर बनीं एसडीओ।

  3. आर्थिक तंगी के बावजूद दिल्ली में की कड़ी मेहनत।

दिनेश कुमार पाण्डेय, दिनारा (रोहतास)। कहते हैं कि असफलता उसी की होती है, जो कोशिश करना छोड़ देता है। बिहार के रोहतास जिले की सुधा सिंह ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। आर्थिक तंगी और लगातार दो बार मिली असफलता भी उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी।

68वीं और 69वीं बीपीएससी के इंटरव्यू में सफल नहीं होने के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। आखिरकार 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 167वीं रैंक हासिल कर एसडीओ बनने का सपना पूरा कर लिया। उनकी यह कामयाबी आज उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो असफलताओं के कारण अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं।

दो बार इंटरव्यू में मिली निराशा, तीसरी कोशिश में मिली मंजिल

रोहतास जिले के दिनारा प्रखंड की करहंशी पंचायत अंतर्गत धरहरा गांव की रहने वाली सुधा सिंह ने बताया कि 68वीं और 69वीं बीपीएससी परीक्षा के इंटरव्यू में असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।

हर बार अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश की और तैयारी में जुटी रहीं। 70वीं बीपीएससी का रिजल्ट आने वाले दिन वह पूरी रात जागकर परिणाम का इंतजार करती रहीं।

जैसे ही सफलता की खबर मिली, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने सबसे पहले बड़े भाई और माता-पिता को फोन कर एसडीओ बनने की खुशखबरी दी।

पिता ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं, परिवार ने नहीं टूटने दिया हौसला

सुधा के पिता जगनारायण सिंह वर्ष 1994 से रांची में रहकर ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं। उनकी मां विंध्याचली देवी ने भी आर्थिक चुनौतियों के बीच बेटी की पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया।

बड़े भाई शशांक शेखर सिंह ने भी हर मुश्किल वक्त में उनका हौसला बढ़ाया। सुधा तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद माता-पिता ने उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी।

दिल्ली में रोज 8 से 12 घंटे पढ़ाई, रातभर भी करती थीं तैयारी

बीपीएससी की तैयारी के लिए सुधा दिल्ली में रह रही थीं। वहां वह रोजाना आठ से 12 घंटे तक पढ़ाई करती थीं। परीक्षा नजदीक आने पर कई बार पूरी रात पढ़ाई में गुजर जाती थी।

उनका पहला सपना डिफेंस क्षेत्र में जाने का था, लेकिन एसएसबी क्वालीफाई नहीं कर सकीं। इसके बाद बड़े भाई ने उन्हें सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। यहीं से उनके जीवन का लक्ष्य बदल गया और उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का संकल्प लिया।

झारखंड से स्कूली शिक्षा, आरा से हासिल की स्नातक की डिग्री

सुधा की शुरुआती पढ़ाई झारखंड में हुई। उन्होंने वर्ष 2013 में सरकारी स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा 75 प्रतिशत अंकों के साथ पास की।

वर्ष 2015 में बिहार बोर्ड से इंटरमीडिएट में 70 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद वर्ष 2018 में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से स्नातक की पढ़ाई 70 प्रतिशत अंकों के साथ पूरी की। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन शुरू से ही रही।

गया में चल रही ट्रेनिंग, अब UPSC पर नजर

70वीं बीपीएससी में सफलता के बाद सुधा सिंह फिलहाल गया जी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। एसडीओ बनने के बाद भी उन्होंने अपने सपनों को सीमित नहीं किया है।

उनका अगला लक्ष्य यूपीएससी की तैयारी कर देश की सेवा करना है। सुधा का मानना है कि कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए।

युवाओं को दिया संदेश, असफलता से घबराएं नहीं

सुधा सिंह की कहानी बताती है कि सफलता का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। दो बार इंटरव्यू में असफल होने के बाद भी उन्होंने तीसरी कोशिश में अपनी मंजिल हासिल की।

वह युवाओं को संदेश देती हैं कि कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित रहकर ईमानदारी से पढ़ाई करनी चाहिए। उनके संघर्ष ने साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मजबूत इरादे सफलता का रास्ता बना सकते हैं।

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