रोहतास। इसे तरीका बदलने की बात कहें या फिर सोच में बदलाव की। कल तक विद्यालयों की बजाए कोचिग की ओर मुखातिब दिखने वाले बच्चे अब अपना समय स्कूल में देने लगे हैं। पहले की अपेक्षा उनकी उपस्थिति भी विद्यालयों में दिखने लगी है। छात्रों का मन भी पढ़ाई-लिखाई में लगने लगा है। बहरहाल बेपटरी हुई सरकारी विद्यालयों में शिक्षा को पटरी पर लाने के उद्देश्य से उन्नयन बिहार के तहत शुरू स्मार्ट क्लास का असर अब धीरे-धीरे दिखने लगा है। लेकिन जिला प्रशासन के आदेश को धत्ता बता जिले में संचालित हो रहे अनगिनत कोचिग संस्थान उन्नयन बिहार कार्यक्रम को संचालित होने में आड़े आ रहे हैं। इस बात को विभाग के आला अधिकारी भी मानने लगे हैं। कारण कि कई ऐसे सरकारी शिक्षक हैं, जो अपने विद्यालय में पढ़ाने की बजाए अपना समय कोचिग संचालन में अधिक दे रहे हैं, जिनकी तलाश में विभागीय अधिकारी जुट गए हैं। रहन-सहन ही नहीं पढ़ाई में भी स्मार्ट हो रहे बच्चे :

जिले के 197 उच्च विद्यालयों में संचालित हो रहे स्मार्ट क्लास का असर बच्चों के रहन-सहन ही नहीं बल्कि उनके शिक्षण कार्य पर दिख रहा है। इस क्लास के माध्यम से अब विज्ञान से ले संस्कृत व उर्दू विषय तक की ज्ञान हासिल बच्चे करेंगे। फिलहाल विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, गणित व हिदी की ही पढ़ाई इस क्लास के माध्यम से होती है। अगले माह से स्मार्ट क्लास में संस्कृत व उर्दू की भी पढ़ाई की जाएगी। तभी तो स्वामी शिवानंद एकेडमी की छात्रा सोनम कहती हैं कि अगर इस तरह की पढ़ाई हो तो उन्हें कोचिग संस्थान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कारण कि ऑडियो-वीडियो के माध्यम से ज्ञान हासिल कराया जा रहा है, उससे हम छात्रों को सीखने का बेहतर मौका मिलता है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालय होंगे पुरस्कृत :

उन्नयन बिहार कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्रत्येक माह पुरस्कृत किया जाएंगे। यही नहीं वार्षिक मूल्यांकन में टॉप थ्री विद्यालयों को गणतंत्रत दिवस पर पुरस्कृत करने की योजना है, ताकि सरकारी विद्यालयों की शिक्षा को उस मोड़ पर खड़ा किया जा सके, कि वहां पढ़ने वाले बच्चे प्रतिभावान बन सके। इसे ले अधिकारियों द्वारा लगातार अनुश्रवण भी किया जा रहा है, जिससे कि कक्षा संचालन में किसी प्रकार की कठिनाइयां हो तो उसे दूर किया जा सके। कहते हैं अधिकारी :

जिले में 15 जुलाई से स्मार्ट क्लास का संचालन किया जा रहा है। फिलहाल 197 उच्च विद्यालयों में इस कक्षा का संचालन हो रहा है। जिसका असर भी दिखने लगा है। छात्रों में भी स्मार्ट क्लास के प्रति अभिरुचि बढ़ने लगी है। लेकिन कोचिग संस्थान अभी भी इसमें आड़े आ रहे हैं। स्कूल समय में कोचिग संस्थानों के संचालित होने से अभी भी कई बच्चे स्कूल से गायब रह रहे हैं, जिसे सुधारने का प्रयास जारी है। कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं, जो विद्यालय की बजाए कोचिग संचालित कर रहे, जिन्हें चिन्हित किया जा रहा है।

मानवेंद्र कुमार राय

कार्यक्रम अधिकारी सह नोडल पदाधिकारी,

उन्नयन बिहार

Posted By: Jagran

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