ट्यूशन पढ़ाकर भाइयों को बनाया इंजीनियर और रेलवे कर्मी, अब खुद BPSC अफसर बनने की राह पर रोहतास की सपना
सपना सिंह ने विपरीत परिस्थितियों में ट्यूशन पढ़ाकर अपने छोटे भाइयों को इंजीनियर और रेलवे कर्मी बनाया। अब वह खुद ...और पढ़ें

15 की उम्र में परिवार संभालने वाली सपना सिंंह। सौ-स्वयं
HighLights
मां के निधन के बाद संभाली परिवार की जिम्मेदारी।
ट्यूशन पढ़ाकर दोनों भाइयों को बनाया सफल।
अब खुद BPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर अधिकारी बनने की ओर।
उपेंद्र मिश्र, डेहरी ऑनसोन (रोहतास)। कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो परिस्थितियां चाहे जितनी भी विपरीत हों, मंजिल तक पहुंचने का रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है।
स्थानीय राजपूतान मोहल्ले की रहने वाली सपना सिंह इस बात का उदाहरण हैं। महज 15 साल की उम्र में सिर से मां का साया उठ गया।
पिता की गंभीर बीमारी के बीच सपना ने न केवल पूरे परिवार को संभाला, बल्कि ट्यूशन पढ़ाकर अपने दोनों छोटे भाइयों का भविष्य भी संवार दिया।
2009 में मां की मौत के बाद संभाली जिम्मेदारी
मूल रूप से करगहर से ताल्लुक रखने वाला यह परिवार बेहतर कल की तलाश में डेहरी आया था। 2009 में मां पम्मी देवी का असमय निधन हो गया।
उस वक्त तीनों बच्चों की उम्र काफी कम थी। पिता श्रवण सिंह कड़ी मेहनत-मजदूरी कर घर चला रहे थे, लेकिन जल्द ही वे भी गंभीर रूप से बीमार पड़ गए।
इस कठिन दौर में किशोरवय सपना ने हिम्मत नहीं हारी। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में सपना ने भाइयों की परवरिश और शिक्षा का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया।
पढ़ाई में मेधावी सपना ने खुद की शिक्षा जारी रखने के साथ-साथ ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को दरकिनार कर उन्होंने भाइयों की पढ़ाई को हमेशा पहली प्राथमिकता दी।
दो भाइयों को पढ़ाने के बाद अब अपना भविष्य संवारने की राह पर
सपना के इसी समर्पण का नतीजा है कि आज उनका एक भाई सचिन रेलवे में क्लर्क के पद पर कार्यरत रहते हुए लाइब्रेरियन की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरा भाई संजीव एनआइटी अगरतला से बीटेक कर चुके हैं।
भाइयों को काबिल बनाने के बाद सपना ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं का रुख किया और बिहार लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की।
आगे की परीक्षा में सफलता को लेकर वह आश्वस्त हैं। सपना आज उन तमाम बेटियों के लिए एक मिसाल हैं, जो विपरीत परिस्थितियों से जूझकर अपने परिवार की तकदीर बदलने का हौसला रखती हैं।